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कैसे एक बस कंडक्टर बना सुपरस्टार !!!

आज हम ऐसी महान हस्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने फर्श से अर्श तक आने की कहावत को सच साबित करके बताया। जी हाँ ! हम बात कर रहे हैं सुपरस्टार “रजनीकांत” जी की। जिन्होंने बड़ी बड़ी सफलताएं हासिल कर अपने अभावों और संघर्षों में इतिहास रचा है और वैसा शायद पूरी दुनिया में कम ही लोग कर पाएं होंगे क्योंकि एक कारपेंटर से कुली बनना फिर कुली से बी.टी.एस. कंडक्टर और फिर एक कंडक्टर से विश्व के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध सुपरस्टार बनने तक का सफ़र कितना परिश्रम भरा होगा ये हम सब सोच ही सकते हैं। जिस स्थान पर आज रजनीकांत हैं उसके लिए जितना परिश्रम और त्याग चाहिए होता है शायद रजनीकांत जी ने उससे कहीं ज्यादा किया है|


रजनीकांत जी का जन्म 12 दिसम्बर 1950 को कर्नाटक के बैंगलोर में एक मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में हुआ था।  वे अपने परिवार में सबसे छोटे थे।  उनके पिता पुलिस में हवलदार थे और मात्र पांच वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपनी माँ को खो दिया था । उनका जीवन बचपन से ही मुश्किलों भरा रहने लगा क्योंकि घर की आर्थिक स्तिथि धीरे धीरे ख़राब होने लगी थी। इस वजह से इन्होने युवावस्था में ही कुली के तौर पर अपने काम की शुरुआत कर दी फिर आगे चलकर वे ब.टी.एस में बस कंडक्टर की नौकरी करने लगे। कंडक्टर के तौर पर करने के बाद भी उनका अंदाज़ किसी स्टार से कम नहीं था। वो अपने अलग अलग action से टिकट काटने और सीटी मारने की शैली को लेकर यात्रियों और दूसरे बस कंडक्टरों के बीच मशहूर थे। उन्होंने कई मंचों पर नाटक भी किया  जिसके कारण उनका फिल्मों और एक्टिंग के लिए शौक बढ़ता चला गया और उनका वही शौक धीरे धीरे जुनून में बदल हो गया।



फिर क्या था उन्होंने अपना काम छोड़कर चेन्नई के “Adyar Film Institute” में दाखिला ले लिया। वहीँ इंस्टिट्यूट में ही एक नाटक के दौरान उस समय के मशहूर फिल्म निर्देशक ‘के. बालाचंदर’ की नज़र रजनीकांत पर पड़ी और वो रजनीकांत से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी फिल्म में एक चरित्र निभाने का प्रस्ताव दे डाला। फिल्म का नाम था “अपूर्व रागांगल” ! यह इनकी पहली फिल्म थी लेकिन इस फिल्म में इनका किरदार बेहद छोटा था जिसके कारण उन्हें असली पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वे योग्य थे। लेकिन फिल्म में जिस जिसकी नज़र रजनीकांत पर पड़ी, लोग उनकी एक्टिंग की तारीफ़ करते हुए पीछे नहीं हटे ।

रजनीकांत ने परदे पर पहले नकारात्मक रोल यानी विलेन के किरदार से शुरुआत की, फिर उसके बाद साइड रोल किये और आखिरकार एक अभिनेता के तौर पर उन्होंने अपनी पहचान बनाई| वे पहली बार हीरो के तौर पर फिल्म “ओरु केल्विकुर्री” में नजर आये। फिर क्या था इसके बाद रजनीकांत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और दर्जनों हिट फिल्मों की बारिश कर दी और रजनीकांत जी ने यह साबित कर दिया कि उम्र कोई मायने नहीं रखती। 65 वर्ष के उम्र के में वे आज भी “शिवाजी- द बॉस”, “रोबोट”, “कबाली” जैसी धमाकेदार हिट फिल्में देने का जज्बा रखते हैं।

रजनीकांत जी के लोग इतने दीवाने हैं कि ‘कबाली’ फिल्म रिलीज़ होने से पहले ही इस फिल्म ने 200 करोड़ रूपये कमा लिए और एक ऐसा समय भी था जब वे एक बेहतरीन अभिनेता होने के बावजूद उन्हें कई वर्षों तक नज़रंदाज़ किया जाता रहा पर उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं हारी और उनकी मेहनत रंग लायी ।



रजनीकांत आज इतने बड़े superstar होने के बावजूद भी ज़मीन से जुड़े हुए हैं। वे असल जिंदगी में एक सामान्य व्यक्ति की तरह ही दिखते हैं और शायद इसीलिए उनके प्रशंसक उन्हें प्यार ही नहीं करते बल्कि उनको पूजते भी हैं।

रजनीकांत जी के बारे में ये बात मानने वाली है कि उनके पास कोई भी व्यक्ति मदद मांगने आता है तो वे उसे खाली हाथ नहीं भेजते। रजनीकांत अपने प्रशंसकों के इतने प्रिय हैं कि इस बात का पता इसी से लगाया जा सकता है कि दक्षिण में उनके नाम से उनके प्रशंसकों ने एक मंदिर तक बनवा दिया | इस तरह का प्यार और सत्कार शायद ही दुनिया के किसी सितारे को मिला हो।


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