Biography

भारत की बुलबुल कही जाने वाली “सरोजिनी नायडू” की जीवनी !

दोस्तों ! आपका स्वागत है “Stayreading.com” और आज हम आपको भारत की महान महिला सरोजिनी नायडू के जीवन संघर्ष के बारे में बताने जा रहे हैं। इनका जन्म 13 february 1879 में हैदराबाद में हुआ था। इनके पिता का नाम “अघोरे नाथ चट्टोपाध्याय” और माता का नाम “बरदा सुंदरी देवी” था । वैसे इनका पैतृक गाओं ब्रह्मंगांव, बिक्रमपुर में है जो वर्तमान में बांग्लादेश के अंदर आता है ।

इनके पिता Edinburgh University से विज्ञान के डॉक्टरेट थे, जो बाद में हैदराबाद में Settle हो गए और हैदराबाद महाविद्यालय में शामिल हो गए , जो बाद में हैदराबाद का निज़ाम महाविद्यालय बना। इनकी माता बरदा सुंदरी देवी एक बंगाली कवियित्री थीं । सरोजिनी नायडू अपने आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं । इन्होने अपनी 10वी की परीक्षा मद्रास विश्वविद्यालय से की, लेकिन बाद में वे 4 साल पढ़ाई से दूर रहीं ।

वर्ष 1895 में, “निज़ाम शिष्यवृत्ति संस्था” जो 6ठे निज़ाम- मीर महबूब अली खान ने स्थापित की , उन्होंने सरोजिनी को “किंग्स कॉलेज” (इंग्लैंड) में पढने का मौका दिया और बाद में गीर्तोंन कॉलेज और कैम्ब्रिज कॉलेजमें भी पढने का मौका दिया। तो आइए दोस्तों! हम आपको सरोजिनी नायडू के जीवन से सम्बंधित और भी महत्वपूर्ण किस्से सुनाते हैं और हम उम्मीद करते हैं कि इनकी जीवनी से आपको काफी कुछ सीखने को भी मिलेगा। 


पूरा नाम : सरोजिनी गोविंद नायडू ।


जन्म : 13 फरवरी 1879 ।


जन्मस्थान : हैदराबाद ।


पिता : डॉ. अघोरनाथ चट्टोपाध्याय ।


माता : बरदा सुंदरी देवी ।


विवाह : डॉ. गोविंद राजुलू नायडु ।


सरोजिनी नायडू की सफलता :

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सरोजनी एक प्रतिभावान छात्रा थीं, उन्हें उर्दू, तेलगू, इंग्लिश, बांग्ला और फारसी भाषा का अच्छा ज्ञान था। वे “भारत की बुलबुल” के नाम से भी जानी जाती हैं। वे एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और कवियित्री भी थीं । बचपन से ही पढने में काफी अच्छी होने के कारण इन्होने 13 वर्ष की ही उम्र में “Lady of the Lake” की एक कविता लिख डाली ।



वैसे “Golden threshold” इनकी पहली कविता थी । इनकी दूसरी और तीसरी कविता संग्रह “Bird of time” और “Broken Wing” ने उन्हें एक सुप्रसिद्ध कवयित्री बना दिया। यह भारत की पहली महिला राज्यपाल भी बनी। साथ के साथ यह वर्ष 1925 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की दूसरी महिला अध्यक्ष भी बनी ।

विवाह :

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सरोजिनी का विवाह मात्र 19 वर्ष की आयु में हो गया। पढाई खत्म करने के बाद वे डॉक्टर “गोविंद राजुलू नायडू” से मिली, जिनसे उनकी शादी कर दी गयी। उस समय Inter cast marriage करने की अनुमति नही होती थी, लेकिन उनके पिता ने उनकी शादी के लिए हां कर दी थी। उनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहा और इस शादी से उन्हें चार संतान जयसूर्या, पदमज, रणधीर और लीलामणि हुए।



भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में हुईं शामिल :

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वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के दौरान जब सरोजिनी भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुईं तो इस दौरान यह गोपाल कृष्ण गोखले, रवींद्रनाथ टैगोर, मोहम्मद अली जिन्ना, एनी बेसेंट, सीपी रामा स्वामी अय्यर, गांधीजी और जवाहर लाल नेहरू से मिलीं। भारत में महिला सशक्तिकरण और महिला अधिकार के लिए भी उन्होंने आवाज भी उठाई । इन्होने State level से लेकर छोटे शहरों तक हर जगह महिलाओं को जागरूक किया।

आंदोलन के दौरान गईं जेल :

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“सविनय अवज्ञा आंदोलन” के दौरान वे गांधी जी के साथ जेल भी गयीं। वर्ष 1942 के ̔भारत छोड़ो आंदोलन ̕ में भी उन्हें 21 महीने के लिए जेल में रहना पड़ा था और बहुत सारी पीड़ाएं भी सहनी पड़ी ।



उत्तरप्रदेश की पहली राज्यपाल बनीं :

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अपनी प्रतिभा के कारण सरोजिनी वर्ष 1925 में कानपुर में हुए कांग्रेस अधिवेशन की वे अध्यक्ष बनीं और उत्तरप्रदेश की पहली राज्यपाल भी बनीं। बाद में वे लखनऊ में जाकर बस गईं और वहाँ गौरवपूर्ण व्यवहार के साथ अपने राजनैतिक कर्तव्यों को बखूबी से निभाया।

सरोजनी नायडू के नाम पर डाक-टिकट :

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13 फरवरी 1964 को भारत सरकार ने उनकी जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में 15 पैसे का डाक टिकट जारी किया।

स्वतंत्रता का सन्देश फ़ैलाने में रहीं सक्षम :

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इन्होने देशभर में घूमकर स्वतंत्रता का सन्देश फैलाया और हिन्दू-मुस्लिम की एकता पर भी जोर दिया। सरोजिनी नायडू ने नारी मुक्ति और नारी-शिक्षा आन्दोलन” भी शुरू किया।  इसमें नारी विकास को ध्यान में रखकर “अखिल भारतीय महिला परिषद्” की सदस्य बन गईं। इसके बाद वे इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशो का भी दौरा किया।

इसके साथ साथ वे गाँधी जी की दांडी यात्रा में भी शामिल थीं। सरोजिनी नायडू बहुत सी भाषाओ को जानती थीं जिस कारण ये जिस भी राज्य व देश में जाती वहां की भाषा में ही अपना भाषण देती थीं। एक बार लंदन की एक सभा में इन्होने अंग्रेजी में बोलकर वहां मौजूद सभी लोगो को हैरान कर दिया और उनके दिल और दिमाग में छा गईं।



मृत्यु :

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वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद सरोजनी नायडू को उत्तर प्रदेश का गवर्नर बनाया गया और वे भारत की पहली महिला गवर्नर बन गई। लेकिन 2 मार्च 1949 को ऑफिस में काम करते हुए उन्हें Heart attack आया जिसकी वजह से उनकी मृत्यु हो गई। सरोजनी नायडू आज भारत की सभी महिलाओं के लिए आदर्श का प्रतीक है, वे एक सशक्त महिला थी जिनसे हमें आज भी प्रेरणा मिलती है और इनका नाम भारतीय इतिहास में सदैव याद रखा जायेगा। इनके जन्मदिवस को भारत में ‘राष्ट्रीय महिला दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रंशसा के लिए सामान्य उत्सव के रूप में चिह्नित किया गया है। 


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