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पहली सेल (Sale) – Inspirational Story

यह कहानी एक छोटे बच्चे की है जिसमे कुछ कर दिखने की लगन थी . आदर्श, शरद ऋतु (winter) में एक शनिवार की दोपहर Office से घर जल्दी गया ताकि वह कुछ जरूरी काम कर सके . जब वह काम कर रहा था , तो उसका 10 साल का बेटा ‘यश’ आया और उसने उसकी पैंट का पायचा खींचा . उसने कहा , डैडी  मेरे लिए एक साइनबोर्ड बना दें. आदर्श ने जवाब दिया, अभी नहीं यश, मैं अभी कुछ जरूरी काम कर रहा हूँ . लेकिन मुझे साइनबोर्ड बनना है, यश ने कहा . 

आदर्श पूछा , क्यों ?

उसने कहा – मैं पत्थर बेचना चाहता हूँ .

पत्थरों में यश की गहरी दिलचस्पी थी . उसने बहुत से पथर इक्कठा कर रखे थे . और लोग उसके लिए दूर-दूर से पत्थर ले कर आते थे. गैरेज में पथरो की बास्केट रखी थी जिन्हें वह बार-बार धोता, उन्हें साफ़ करता और फिर से सजता . वे उसके लिए ‘खजाने’ की तरह थे .




आदर्श ने कहा, मैं अभी व्यस्त(busy) हूँ . यश आप जाकर अपनी मम्मी से मदद माँगो .

कुछ समय बाद यश कागज लेकर आया, उस पर उसकी लिखावट में लिखा था “यह बिकाऊ है, सिर्फ 10 रूपये में”.  उसकी माँ ने उसकी साइनबोर्ड बनने में मदद की, अब वह अपना Business शुरू करने जा रहा था . वह साइनबोर्ड लेकर, चार सबसे अच्छे पत्थर बास्केट में रख घर के सामने पहुंच गया . वहाँ उसने पत्थरों को सही तरीके से लगा दिया . आदर्श दूर से उसको देख रहा था . हालांकि आदर्श को यश की सफलता की कोई उमीद नहीं थी . आधे घंटे तक वहाँ से कोई नहीं गुज़रा, फिर आदर्श ने उससे पूछा – कैसा चल रहा है यश ?

उसने जवाब दिया , बहुत अच्छा .

तुम अपने पत्थरों की कितनी कीमत मांग रहे हो ?

यश ने जवाब दिया, “हर एक की कीमत 10 रूपये” .

और ये साथ में खाली box,

ये, ये तो पैसे रखने के लिए है . यश ने answer दिया .

तुम्हे एक पत्थर के बदले में 10 रूपये कोई नहीं देगा .

“ज़रूर देगा” यश ने अपनी आवाज तेज करते हुए जवाब दिया मनो उसे विश्वास ही नहीं बल्कि पूरी आस्था हो की ओ पत्थर बेच कर ही रहेगा .

यश, हमारी सड़क पर ज्यादा लोग आते-जाते नहीं है . ऐसा करो अपना सामान समेटो और जाकर खेलो . नहीं डैडी, उसने कहा . काफी लोग आते-जाते है . लोग यहाँ पर सैर करने आते है. और कुछ लोग तो मकान की तलाश में भी आते-जाते रहते है . यह सब सुनकर आदर्श वापस अपनी सफाई के काम में जुट गया . लेकिन वह वही डटा रहा . कुछ समय बाद वहाँ से एक मिनी वैन सड़क पर आई . आदर्श ने देखा की यश ने वैन की तरफ देखकर अपना साइनबोर्ड उठा कर वैन (van) की तरफ इशारा किया .

जब वैन (van) धीरे-धीरे गुज़री तो आदर्श ने देखा कि एक युवा दंपति अपनी गर्दन मोड़कर साइनबोर्ड की तरक देख रही थी . आगे रास्ता बंद था, इसलिए उन्हें लौटना पड़ा . जब वे दोबारा यश के करीब आये, तो महिला ने अपनी खिड़की का काँच नीचे कर लिया .




यूँ तो आदर्श ने बातचीत तो नहीं सुनी लेकिन वह वैन (van) चलने वाले पुरुष और महिला दोनों यश के पास आये. पत्थरों को देखने के बाद पुरुष ने अपना पर्स निकाला .  उसने उस महिला को 10 रूपये दिया . पत्थरों को देखने के बाद एक पत्थर चुना और यश को 10 रूपये देकर चली गई . आदर्श हैरान था . यश भागकर आदर्श के पास आया और चिल्लाया , ” मैंने आपसे कहा था ना कि “मैं एक पत्थर 10 रूपये में बेच सकता हूँ ” .

यह छोटा लड़का अपने विश्वास पर डटा रहा और उसे यह साबित करने में मज़ा आ गया कि वह यह काम कर सकता है . वह पत्थर बेच सकता है.

दोस्तों ऐसे लोगों से दूर रहें जो आपकी महत्वाकांक्षाओं को छोटा करना चाहते हैं . छोटे लोग हमेशा ऐसा करते हैं लेकिन सचमुच महान लोग आपको यह एहसास कराते हैं कि आप भी महान बन सकते हैं .


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