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श्री कृष्ण से सीखें जिंदगी जीने का मंत्र !

श्री कृष्ण आपके लिए जिंदगी जीने के बेहतर तरीके बतलाते हैं, जिन्हे आप अपने कर्मों से जीवन की बांसुरी को और भी ज्यादा मधुर बना सकते हैं। दोस्तों जैसा आप जानते हैं कि हमारे चारों ओर कर्म बिखरे हुए हैं। जिसमे हमारा बीता कल , आज और आने वाला समय हमारे कर्मों से ही बंधा हुआ है।

इससे हम बच नहीं सकते। कर्म तो हर हाल में करना ही है क्योंकि कार्य न करना भी एक कर्म ही है और आधे-अधूरे मन से किये कर्म हमें पूरी ख़ुशी कैसे दे सकते हैं ! इसलिए जब आप कोई कार्य करते हैं तो उसको किसी भी हाल में पूरा कीजिए। यह कोई मज़बूरी नहीं है बल्कि हमारे तन , मन और आत्मा का आनंद है। कृष्ण इसी उपदेश द्वारा हम सभी को यह सन्देश देना चाहते हैं , जिसे हम अपनी जिंदगी में स्वीकार करके किसी भी परिस्तिथि में हर कार्य को पूरा कर आनंद हासिल कर सकते हैं। 


1. याद रखिये हर बांस बांसुरी नहीं बनता :

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जैसा कि आप जानते हैं बांसुरी यानि बांस से बना वाद्य यन्त्र लेकिन यह वाद्य यन्त्र हर बांस से नहीं बनता। बांसुरी केवल उसी की बनती है , जो बांस खुद को पूरी तरह खाली कर लेता है। ठीक इसी तरह हमारे अंदर अहंकार , जिद और जलन की किसी भी गाँठ को भीतर रखने से हमारी जिंदगी बांसुरी की तरह मधुर बन ही नहीं सकती। हमारे संघर्ष , दुःख और दर्द बांसुरी के वो छेद हैं, जिनसे गुज़रते हुए हमारे किये गए कर्म मधुर गूंज पैदा करते हैं।  




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • बांसुरी केवल उसी की बनती है , जो बांस खुद को पूरी तरह खाली कर लेता है। ठीक इसी तरह हमारे अंदर अहंकार , जिद और जलन की किसी भी गाँठ को भीतर रखने से हमारी जिंदगी बांसुरी की तरह मधुर बन ही नहीं सकती।
  •  हमारे संघर्ष , दुःख और दर्द बांसुरी के वो छेद हैं, जिनसे गुज़रते हुए हमारे किये गए कर्म मधुर गूंज पैदा करते हैं।  
  • श्रीकृष्ण की सफल रणनीति का सबसे बड़ा सूत्र है – कुशलता । इसमें आप किसी भी क्षेत्र में विशेष ज्ञान पाकर खुद को कुशल बनाएं और व्यावहारिक सोच रखें। यही आपकी योग्यता की सबसे बड़ी ताकत होगी। 

2. बुरे वक़्त में भी मुस्कुराना सीखिए :

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श्री कृष्ण हम सभी को यह बतलाना चाहते हैं कि हमको युद्ध के मैदान (यानी जिंदगी के मुश्किल पलों) में भी मुस्कुराते हुए अपना कर्म करना चाहिएकिसी भी हालात में हमें डरे हुए , उदास और रोते हुए नहीं दिखना है। अगर आप खुद को डूबते हुए भी कर्म करते हैं तो अगले ही पल आप आगे बढ़ते नज़र आएंगे। कृष्ण हमें प्रकृति के करीब जीने पर जोर देते हैं। इसी के अनुसार कर्म करना हमें अपनी संभावनाओं तक ले जाता है। जब हम अपने कर्म में पूरी तरह से लीन हो जाते हैं और उसे पूरे मन से करते हैं , तब नतीजा जो भी निकले , हम तनाव और चिंताओं में नहीं घिरते। 








छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • हमें युद्ध के मैदान में भी मुस्कुराते हुए अपना कर्म करना चाहिए। 
  • अगर आप खुद को डूबते हुए भी कर्म करते हैं तो अगले ही पल आप आगे बढ़ते नज़र आएंगे। 
  • कर्म करना हमें अपनी संभावनाओं तक ले जाता है। जब हम अपने कर्म में पूरी तरह से लीन हो जाते हैं और उसे पूरे मन से करते हैं , तब नतीजा जो भी निकले , हम तनाव और चिंताओं में नहीं घिरते।

3. कर्म करो क्योंकि यही आपके हाथ में है :

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“कर्मण्यवाधिकारस्ते मा फलेषु” में कृष्ण कहते हैं कि पहले कर्म करो और सिर्फ कर्म करो, क्योंकि यही आपके हाथ में है। फल देने का काम किसी और के हाथ में है। फल की इच्छा नहीं करने का मतलब ये भी नहीं कि कर्म न किये जाएँ। इस कारण और परिणाम का सिद्धांत हर जगह लागू होता है। जब कर्म बेहतर होंगे तो नतीजे भी काफी बेहतर होंगे।   




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • पहले कर्म करो और सिर्फ कर्म करो, क्योंकि यही आपके हाथ में है। फल देने का काम किसी और के हाथ में है।
  • जब आपके कर्म बेहतर होंगे तो नतीजे भी काफी बेहतर होंगे।   
  • श्रीकृष्ण ने हमेशा अपनी बाल लीलाओं से यह संदेश देने की कोशिश की है कि हमें कभी भी किसी से हार नहीं माननी चाहिए।

4. कर्म ही आपकी मंज़िल है :

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हमें सब बातों की परवाह छोड़कर सिर्फ और सिर्फ अपने कर्मों की तरफ ध्यान लगाना चाहिए। कृष्ण कहते हैं “योग: कर्मसु कौशलम” कहने का तात्पर्य है कि पूरे कौशल के साथ किया गया काम ही योग है। यानी हम काम करें और उसे बेहतर तरीके से करें। शांत और स्थिर मन से करें। जब आप इसी तरह कर्म करने लगेंगे तो आप हर पल को भरपूर जीना सीख जाएंगे और हार को भी महसूस नहीं करेंगे




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • सभी बातों की परवाह छोड़कर सिर्फ और सिर्फ अपने कर्मों की तरफ ध्यान लगाना चाहिए। 
  • पूरे कौशल के साथ किया गया काम ही योग है। 
  • जब आप इसी तरह कर्म करने लगेंगे तो आप हर पल को भरपूर जीना सीख जाएंगे और हार को भी महसूस नहीं करेंगे।

5. प्रत्येक व्यक्ति कृष्ण बन सकता है :

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इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति अलग है परन्तु सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम लोग बिना कर्म किये ही आगे पीछे की चिंता पहले ही करने लग जाते हैं और फिर किसी और के जैसे होने की कोशिश करते हैं , जो कि गलत है। इसी बात पर ओशो का कहना है कि “हर व्यक्ति कृष्ण है” , पर हम अपने भीतर के कृष्ण से मिलना नहीं चाहते। कृष्ण को पूजना चाहते हैं ,पर हम कृष्ण नहीं होना चाहते। कृष्ण होने के लिए कर्म करना जरुरी है। लेकिन हमारी कोशिशों में अभी भी कहीं कमी है इसलिए कृष्ण हमारे अंदर शेष हैं। 




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  •  “हर व्यक्ति कृष्ण है , पर हम अपने भीतर के कृष्ण से मिलना नहीं चाहते। कृष्ण को पूजना चाहते हैं ,पर हम कृष्ण नहीं होना चाहते। कृष्ण होने के लिए कर्म करना जरुरी है। 
  • हम लोग बिना कर्म किये ही आगे पीछे की चिंता पहले ही करने लग जाते हैं और फिर किसी और के जैसे होने की कोशिश करते हैं , जो कि गलत है। 
  • हमें अंत तक प्रयास करते रहना चाहिए, भले ही परिणाम हमें हार के रूप में मिले। किंतु अगर हम प्रयास ही नहीं करेंगे, तो वह हमारी असली हार होगी।

6. परिस्तिथि के अनुसार खुद को ढालने की कला :

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श्रीकृष्ण जी के अंदर सबसे खास बात यह थी कि वह किसी बने रास्ते पर नहीं चलते थे। वे अपना रास्ता खुद बनाते थे। वह परिस्तिथि अनुसार खुद को बदल लेते थे। उदाहरण के तौर पर उन्होंने महाभारत में अपनी भूमिका बदली और अर्जुन के सारथी बन गए । भगवान कृष्ण से हमें दोस्ती करनी सीखनी चाहिए, उन्होंने मु्श्किल वक्त में पांडवों का साथ दिया था । ऐसा करके उन्होंने साबित किया कि दोस्त वही अच्छे और सच्चे होते हैं जो कठिन परिस्थिति में भी आपके साथ हो। ऐसे में आपको भी ऐसे दोस्ती बनाने चाहिए, जो हर मुश्किल में आपके साथ रहें।




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • अपने बनाये हुए रास्ते पर चलिए क्योंकि किसी और के बनाए हुए रास्ते पर तो दुनिया भी चलती है । 
  •  दोस्त वही अच्छे और सच्चे होते हैं जो कठिन परिस्थिति में भी आपके साथ हो। ऐसे में आपको भी ऐसे दोस्ती बनाने चाहिए, जो हर मुश्किल में आपके साथ रहें।
  • श्रीकृष्ण एक बड़े घराने के वारिस थे, गोकुल में भी वे राजा नंद के पुत्र थे और उन्हें राज-घराने के तौर तरीके से जीने का पूर्ण अधिकार था। किंतु वे गोकुल के अन्य बालकों की तरह ही रहते, उनके साथ खेलते, उनके साथ घूमते और उनके साथ ही भोजन करते।

7. अपने से श्रेष्ठ लोगों से सीखते रहिये :

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महाभारत के मैदान में अर्जुन ने भगवान कृष्ण से बहुत कुछ सीखा। ठीक वैसे ही आज के युग में भी सभी लोगों को अपने से श्रेष्ठ लोगों से कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए। कृष्ण भी अर्जुन को अपनी गलतियों से सीख लेने का ज्ञान देते रहते थे। इसी तरह अगर महाभारत के मैदान में पांडवों के साथ श्री कृष्ण की master planning न होती तो पांडव को जीत मिलना लगभग नामुमकिन था। यही आज के युग में भी लागू होता है कि किसी भी परीक्षा के लिए एक Master planning बहुत जरुरी है




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • हमें आज के युग में अपने से श्रेष्ठ लोगों से कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए।
  • जीवन भर हम एक गुरु की तलाश में रहते हैं, जो हमारा मार्ग दर्शन कर सके। इसलिए अपने जीवन में भी एक श्रेष्ठ व्यक्ति के साथ रहिये जो आपको जीवन में सफल होने के लिए सहायक सिद्ध हो सके। 
  • किसी भी कार्य के लिए की गई Master planning बहुत जरुरी है। यह आपके राह को और भी आसान बना देगी। 

8. दूरदर्शी होकर कर्म कीजिये :

Boy on a clear night looking thru a telescope Check out this light box with other Astronaut/Space Images by Nashville Photographer, Dieter Spears, Owner of Inhaus Creative. [url=http://www.istockphoto.com/search/lightbox/2459726#898cb29][img]http://dieterspears.com/istock/links/button_space.jpg[/img][/url]

जैसा कि आप जानते हैं कि भगवान श्री कृष्ण काफी दूरदर्शी थे। ऐसे ही आज के दौर में भी आपको हर बात में दूरदर्शी होना चाहिए, जिससे समय के हिसाब से चीज़ें आसान हो सके। श्रीकृष्ण हमें यह भी सिखाते हैं कि किसी काम को करने पर अगर आपको असफलता मिले तो हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। अगर हार होती भी है तो व्यर्थ की चिंता करने की बजाए उस हार के कारण को जानना चाहिए और उस पर Improvement लाना चाहिए। इससे सफलता मिलने के मौके कई गुणा बढ़ जाते हैं। किसी भी काम को करने के लिए अनुशासन की बहुत जरूरत होती है। कृष्ण ने भी व्यर्थ चिंता न करने और भविष्य की बजाय वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने का मंत्र दिया है।

छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • आज के इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी को दूरदर्शी होना चाहिए, जिससे समय के हिसाब से सभी चीज़ें आसान लगने लगे ।
  • किसी काम को करने पर अगर आपको असफलता मिले तो हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। अगर हार होती भी है तो व्यर्थ की चिंता करने की बजाए उस हार के कारण को जानना चाहिए और उस पर Improvement लाना चाहिए। 
  • किसी भी काम को करने के लिए अनुशासन की बहुत जरूरत होती है। 

9. कूटनीति का रास्ता अपनाइये :

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भगवान श्री कृष्ण और सुदामा का नाम सुनते ही गहरी दोस्ती की मिसाल याद आ जाती है । कृष्ण ने अपनी दोस्ती में कभी अमीरी-गरीबी नहीं देखी। यही आज के समय पर भी लागू होता है कि अपनी दोस्ती के बीच कभी भी अमीरी-गरीबी को न लाएं । इसलिए भगवान श्री कृष्ण की महान बुद्धि के कारण ही उनको कूटनीतिज्ञ भी कहते हैं। आपको भी आज के समय में सीधे रास्ते से सब कुछ हासिल करना मुमकिन नहीं है , ऐसे में आपको अपने विरोधियों से निपटने के लिए कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए। जिससे आप श्री कृष्ण की तरह महान कूटनीतिज्ञ बन जाएंगे।




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • दोस्ती में कभी अमीरी-गरीबी नहीं देखनी चाहिए । 
  • आज के समय में सीधे रास्ते से सब कुछ हासिल करना मुमकिन नहीं है , ऐसे में आपको अपने विरोधियों से निपटने के लिए कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए। 
  • दोस्ती सिर्फ दोनों में प्रेम को ही नहीं बल्कि एक-दूसरे के प्रति आदर और सम्मान के लिए भी प्रसिद्ध है। किंतु दुःख की बात यह है कि आज के समय में दोस्ती के असली मायने को कोई नहीं जानता।

 10. पीछे हटने की बजाए प्रगति पथ पर चलिए :

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दोस्तों ! महाभारत में जिस तरह से श्रीकृष्ण ने पांडवों से यह कहा था कि पीछे हटने की बजाए प्रगति पथ पर मार्ग प्रशस्त करें। ठीक उसी तरह आपको भी इसी प्रगति पथ चलना चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि एक Employee कम्पनी से लगाव होने के कारण बढिया अवसरों को छोड़ रहा है,तो यह उसकी सबसे बड़ी मूर्खता है क्योंकि वह Employee अपने talent को मार देता है। इसलिए हमें अगर कहीं ज्यादा scope , स्थान परिवर्तन में दिखाई देता है तो फिर स्थान परिवर्तन करने में ही आपकी भलाई है। इसलिए श्री कृष्ण के बताये पथ पर और उनकी भक्ति करने वाला व्यक्ति ही अपनी बुद्धि पर विजय प्राप्त कर सकता है । गीता के अनुसार हवा को वश में करना तो फिर भी संभव है, लेकिन दिमाग को वश में कर पाना असंभव है। लेकिन जो व्यक्ति अपने दिमाग को वश में करना सीख गया वह आसानी से दुनिया की हर जगह सफलता को हासिल कर सकता है।




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • महाभारत में जिस तरह से श्रीकृष्ण ने पांडवों से यह कहा था कि पीछे हटने की बजाए प्रगति पथ पर मार्ग प्रशस्त करें। ठीक उसी तरह आपको भी इसी प्रगति पथ चलना चाहिए। 
  • हमें अगर कहीं ज्यादा Scope , स्थान परिवर्तन में दिखाई देता है तो फिर स्थान परिवर्तन करने में ही आपकी भलाई है। 
  • गीता के अनुसार हवा को वश में करना तो फिर भी संभव है, लेकिन दिमाग को वश में कर पाना असंभव है। लेकिन जो व्यक्ति अपने दिमाग को वश में करना सीख गया वह आसानी से दुनिया की हर जगह सफलता को हासिल कर सकता है।

11. सफल होने के लिए स्मृति और बुद्धि का स्वस्थ होना जरुरी है :

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गीता में श्रीकृष्ण ने एक श्लोक के माध्यम से कहा है कि किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए स्मृति और बुद्धि का स्वस्थ होना बहुत जरुरी है। बुद्धि मतलब अच्छी चीजों को परखने की क्षमता, ज्ञान मतलब सभी पहलुओं की बारीकी से जानकारी और स्मृति यानी बुरी चीज़ों को भुलाने और अच्छी चीज़ों को याद करने की क्षमता। यदि इन तीनों पर आज हम केंद्रित हो जाएँ तो जीवन की लगभग सभी कठिनाइयों से छुटकारा पाया जा सकता है। कृष्ण संपूर्ण जीवन के समर्थक हैं । वे पल-पल आनन्द से जीने की प्रेरणा देते हैं।




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए स्मृति और बुद्धि का स्वस्थ होना बहुत जरुरी है। 
  • बुद्धि मतलब अच्छी चीजों को परखने की क्षमता, ज्ञान मतलब सभी पहलुओं की बारीकी से जानकारी और स्मृति यानी बुरी चीज़ों को भुलाने और अच्छी चीज़ों को याद करने की क्षमता।
  • दुनिया चाहे तुम्हारे बारे में कुछ भी कहे, लेकिन तुम स्वयं खुद को दोषी मत बनाओ। जिस दिन तुम अपनी नजरों में गिर गए, उस दिन दुनिया में तुम्हें कोई नहीं उठा सकता।

12. ज्ञान और बुद्धि के जरिये ठीक कीजिये Life Management :

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दोस्तों ! अगर हमारे अंदर अपनी Life management का गुण आ जाए, तो हम अपनी चिंता और परेशान से मुक्त हो जाएंगे । यही Life management हम भगवान श्री कृष्ण से सीख सखते हैं। श्रीकृष्ण द्वारा बताए गए सिद्धांत और गुण आज के युग में भी बड़े कारगार है जितना पहले था। इसी तरह हम भगवान श्री कृष्ण से कई management सीख सकते हैं। कृष्ण ने अनुशासन में जीना, व्यर्थ चिंता न करना और भविष्य के बजाए वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने का मंत्र दिया है और एक अच्छा प्रबंधक होने के लिए ज्ञान और बुद्धि के साथ चरित्र और नैतिक मूल्यों को विकास जरूरी है




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • अगर हमारे अंदर अपनी Life management का गुण आ जाए, तो हम अपनी चिंता और परेशान से मुक्त हो जाएंगे ।
  • कृष्ण ने अनुशासन में जीना, व्यर्थ चिंता न करना और भविष्य के बजाए वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने का मंत्र दिया है और एक अच्छा प्रबंधक होने के लिए ज्ञान और बुद्धि के साथ चरित्र और नैतिक मूल्यों को विकास जरूरी है।
  • श्रीकृष्ण एक राजा थे, वे चाहते तो एक राजा की तरह अपनी प्रजा पर हुक्म चलाते और अपने सभी अधिकारों का आनंद उठाते। लेकिन उनका नम्रता पूर्ण स्वभाव उन्हें यह करने की इजाजत नहीं देता था।

13. हर परिस्तिथि में साहस है जरुरी :

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जीवन में अचानक से सफलता हासिल करना संभव नहीं है। हर क्षेत्र में सफलता के लिए समय और परिश्रम की मांग होती है। अगर रोज हम थोड़ा समय अपने  गुणों को विकसित करने में लगाएं , तो हम अपनी जिंदगी के बेहतर प्रबंधक बन सकते हैं। परिवार और व्यवसायिक संबंधों को खुशहाल बनाए रखने के लिए यह करना जरूरी है। इसी तरह से हम भगवान श्री कृष्ण से हमें यह भी प्रेरणा मिलती है कि चाहे कैसी भी परिस्थिति आ जाए , हमें डगकर नहीं भागना चाहिए  बल्कि उस परिस्थिति का पूरे साहस के साथ सामना करना चाहिए।




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • जीवन में अचानक से सफलता हासिल करना संभव नहीं है। हर क्षेत्र में सफलता के लिए समय और परिश्रम की मांग होती है। 
  • अगर रोज हम थोड़ा समय अपने  गुणों को विकसित करने में लगाएं , तो हम अपनी जिंदगी के बेहतर प्रबंधक बन सकते हैं। परिवार और व्यवसायिक संबंधों को खुशहाल बनाए रखने के लिए यह करना जरूरी है।
  • चाहे कैसी भी परिस्थिति आ जाए , हमें डगकर नहीं भागना चाहिए  बल्कि उस परिस्थिति का पूरे साहस के साथ सामना करना चाहिए।

14. कार्य को सक्षम करने के लिए धैर्य जरुरी है :

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श्री कृष्ण बताते हैं कि अगर आप वक्त के साथ तालमेल बैठाकर आगे बढ़ते हैं तो सफलता मिलना निश्चित है। इसके साथ आपके अंदर धैर्य भी जरूरी है। जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थितियां आए आपको सिर्फ आगे बढ़ते चले जाना है और बिना चिंता किए अपना कार्य को सक्षम बनाना है। इसी तरह से बेहतर जीवन जीने का सूत्र यही है जिसमे साहस, अनुशासन की बात, धैर्य , क्रोध पर नियंत्रण, विचार , गलतियों से सीख, विनम्र व्यवहार बहुत जरुरी है।




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • अगर आप वक्त के साथ तालमेल बैठाकर आगे बढ़ते हैं तो सफलता मिलना निश्चित है। 
  • आपके अंदर धैर्य भी जरूरी है। जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थितियां आए आपको सिर्फ आगे बढ़ते चले जाना है और बिना चिंता किए अपना कार्य को सक्षम बनाना है। 
  • बेहतर जीवन जीने का सूत्र यही है जिसमे साहस, अनुशासन की बात, धैर्य , क्रोध पर नियंत्रण, विचार , गलतियों से सीख, विनम्र व्यवहार बहुत जरुरी है। 

15. जिंदगी के मौकों को समझिये :

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एक समय जो हमको मिलता है कुछ कर गुजरने के लिए और यह मौका जिंदगी बार बार नहीं देती । मौका है जिंदगी को बेहतर बनाने का। इसके लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता है। श्रीकृष्ण को मैनेजमेंट गुरु कहा जाता है। मौकों का लाभ और अवसरों पर बाजी अपने पक्ष में कर लेने की कला दुनिया को उन्होंने ही सिखाई है। आप जहां रहें, जैसे रहें, अगर उसमें खुश रहना सीख गए समझिए आप सफल हैं। इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम बिना धैर्य मन से जी रहे हैं और शायद यही कारण है कि हम सफल तो हैं लेकिन भीतर ही भीतर अशांति भरी हुई है। इसलिए मौकों को समझें और प्रत्येक कार्य को धैर्य के साथ कीजिये। 




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • एक समय जो हमको मिलता है कुछ कर गुजरने के लिए और यह मौका जिंदगी बार बार नहीं देती । मौका है जिंदगी को बेहतर बनाने का। इसके लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता है।
  • श्रीकृष्ण को मैनेजमेंट गुरु कहा जाता है। मौकों का लाभ और अवसरों पर बाजी अपने पक्ष में कर लेने की कला दुनिया को उन्होंने ही सिखाई है।
  • आप जहां रहें, जैसे रहें, अगर उसमें खुश रहना सीख गए समझिए आप सफल हैं।

16. जीवन में कीजिये परिस्थिति का सामना :

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यह तो आप जानते हैं कि श्री कृष्ण का जीवन विपरीत परिस्थितियों से काफी गुजरा है । लेकिन मुश्किलों को handle करने का उनका अपना मैनेजमेंट था। मथुरा के कारागृह में जन्म लेते ही गोकुल के लिए भागने से लेकर अंतिम दिनों में यदुकुल के अंतर्कलह तक, श्रीकृष्ण ने तनाव ही झेला, भागमभाग ही की है, लेकिन हम उन्हें पूजते हैं एक मुस्कराती हुई तस्वीर में। श्री कृष्ण के जीवन से यही सीख मिलती है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, आप मुस्कुराना ना छोड़ें। चेहरे पर चमकती मुस्कुराहट ही आपको कई समस्याओं के समाधान का रास्ता देती हैं। याद रखिये जीवन हमेशा एक ही लकीर पर नहीं चल सकता। परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं, अगर उनमें रहना सीख लिया जाए तो समय का हर पल हमारे साथ चलने को तैयार है । बस हमें यह तय करना होगा कि हमें उस परिस्थिति का सामना कैसे करना है।




छोटी-छोटी मगर मोटी बातें  :

  • श्री कृष्ण का जीवन विपरीत परिस्थितियों से काफी गुजरा है । लेकिन मुश्किलों को handle करने का उनका अपना मैनेजमेंट था। 
  • श्री कृष्ण के जीवन से यह सीख मिलती है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, आप मुस्कुराना ना छोड़ें।
  • परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं, अगर उनमें रहना सीख लिया जाए तो समय का हर पल हमारे साथ चलने को तैयार है । बस हमें यह तय करना होगा कि हमें उस परिस्थिति का सामना कैसे करना है।

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