Success Stories

दिलों पर राज करने वाली “मधुबाला” की Success Story!

आइए दोस्तों !आज हम बॉलीवुड की एक ऐसी अदाकारा के बारे में बताने जा रहे हैं ,जिसकी अदाकारी आज भी लोगों के दिल में बसी हुई है। जी हाँ !!! हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की महान अदाकारा “मधुबाला” जी के बारे में,जिनकी मुस्कराहटों और खूबसूरती के चर्चे आज के दौर में भी होते हैं। इनका जन्म एक ऐसे गरीब परिवार में हुआ था जहाँ दो वक़्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था । उनके अम्मी -अब्बा ने उनका नाम मुमताज बेगम रखा। बचपन से ही मुमताज की हंसी फूल बिखेरती थी। उनके ग्यारह भाई-बहन में मुमताज पांचवी औलाद थीं ।

मुमताज के पिता ‘अताउल्ला’ पेशावर की Imperial Tobacco कंपनी में काम करते थे। कंपनी के बंद हो जाने पर वह दिल्ली आ गये और वहां आकर भी उनके हाथ बेरोजगारी ही लगी । मुसीबत की इस घड़ी में मुमताज़ के चार भाई-बहन अल्लाह को प्यारे हो गये और मुमताज की हंसी भी गायब हो गई जैसे किसी की नज़र लग गई हो।



इसी दौरान उनके अब्बू को एक फकीर की बात याद आ गयी जिसने मुमताज को देखकर कहा था कि, यह लड़की बहुत नाम कमायेगी और जाते-जाते फकीर ने मुमताज के सर पर हाथ रखते हुए कहकर गए कि ‘मैं तुझे जल्दी मिलुंगा बम्बई में’। उनके अब्बू भी सोचने लगे … मुमताज तो कोहिनूर है और उनके अब्बू मुमताज को लेकर बम्बई के लिये रवाना हो गए । मुमताज की अम्मी को यह रास नही आया कि उनकी नाजुक सी बेटी पर परिवार चलाने की जिम्मेदारी सौंपी जाए ।

जब मुमताज को बम्बई जाने की बात पता चली तो वह बहुत खुश हुई क्योंकि उन्हें फिल्मों का शौक शुरू से था । बॉम्बे पहुचकर उनके अब्बू मुमताज को लेकर Bombay Talkies पहुँचे। वहाँ उस जमाने की सफल अभिनेत्री “मुमताज शांति” की नजर बच्ची ‘मुमताज’ पर पड़ी। तब क्या था बस वहीँ से मुमताज़ की जंदगी ने नया मोड़ ले लिया और उन्हें बसंत फिल्म में 100 रूपये महीने पर काम मिल गया।

9 वर्ष की उम्र में ही मुमताज़ ने अपने सफल कैरियर की शुरुआत कर दी  और बतौर child actress उन्हें लोगों के बीच खूब प्रसिद्धी एवं प्यार मिलने लगा । इसी दौरान मुमताज की मुलाकात उस दौर की मशहूर अदाकारा ‘देविका रानी’ से हुई। देविका रानी ‘मुमताज’ की सुंदरता और हंसी पर फिदा हो गई और उन्हें  पास बुलाकर बातें करने लगी और उन्होंने ही मुमताज़ का नाम “मधुबाला” रखा । यहीं से ही मुमताज़ ‘मधुबाला’ के नाम से प्रसिद्ध हो गयीं ।

उनकी अदाकारी के चर्चे हर तरफ होने लगे थे। वर्ष 1947 में ‘केदार शर्मा’ ने ‘मधुबाला’ को ‘नील कमल’ फिल्म में बतौर लीड एक्ट्रेस लेने का निर्णय लिया। उस समय मधुबाला की उम्र 14 वर्ष की थीं और कई लोगों का यह मानना था कि यह छोटी सी उम्र लीड रोल के लिये सही नही बैठेगी । लेकिन फिर भी मधुबालाा ने नील कमल में बतौर लीड एक्ट्रेस काम किया और उस फिल्म के हीरो राजकपूर थे । यह फिल्म Box -Office पर कुछ कमाल तो नही कर पाई लेकिन बतौर पहली फिल्म में मधुबाला की बहुत वाहवाही हुई।

‘कमाल अमरोही’ ने मधुबाला की खूबसूरत अदाकारी को देखकर उन्हें “महल” फिल्म के लिए साइन किया और जबकि इस फिल्म में ‘सुरैया’ पहले से साइन की जा चुकी थीं। उनको हटाने का मतलब था 40,000 रूपये का डूबना लेकिन फिर भी ‘कमाल अमरोही’ ने मधुबाला के साथ फिल्म बनाई। ‘महल’ फिल्म  release हुई और इस फिल्म ने Box -Office पर धमाल मचा दिया और इसी फिल्म का गाना “आयेगा आने वाला” सबके दिलो दिमाग पर छा गया। ‘कमाल अमरोही’ की भी बतौर डायरेक्टर यह पहली फिल्म थी।

मधुबाला की जिंदगी में सब कुछ तो मिल गया था, लेकिन उनकी नज़र से देखा जाये तो उनसे ज्यादा दुखी और परेशान कोई नही था क्योंकि इसी दौर में उन्हें एक ऐसी बीमारी ने घेरा कि उनका साथ उस बीमारी ने अंत तक नहीं छोड़ा। प्रसिद्धी के इस दौर में उन्हें घातक बिमारी ने घेर कर रखा हुआ था । एक सुबह जब उनके मुंह से खून की उलटी हुई तब जाकर उन्हें पता चला कि उनके दिल में छेद हो रखा है । लेकिन उनके अब्बू की सख्त हिदायत थी कि किसी को भी इसके बारे में पता नही चलना चाहिये क्योंकि मधुबाला ही एकमात्र  उनके घर की समृद्धी का स्रोत थी।



फिल्मी दुनिया का चमकता सच यही है कि कितने लोगों को भीतर ही भीतर मरना पड़ता है।अगर बिमारी का पता सबको चल जाता तो उन्हें  film industry उन्हें बाहर का रास्ता दिखा देती। इसलिये मधुबाला अपने दर्द को चुपचाप सहती रही और चमकते संसार को मुस्कराहटें देती रही। दर्द और मुस्कराहटों की ये लुकाछुपी 1954 में फिल्म की शुटिंग के दौरान खत्म हो गई। शुटिंग के दौरान ही मधुबालाा को खून की उल्टी हुई जिसकी खबर आग की तरह पूरी Film Industry में फैल गई। परन्तु मधुबाला की बेहतरीन अदाकारी के आगे इन सब बातों का कुछ ज्यादा असर नही हुआ।

वर्ष 1954 की बात है, मशहूर फिल्मकार बिमल रॉय “बिराज बहू” फिल्म बनाने की योजना बना रहे थे। मधुबाला भी इस फिल्म में काम करने को interested  थीं। परन्तु मधुबाला का market rate उस समय बहुत ज्यादा था तो बिमल राय ने उनकी fees के चलते उनको ignore कर दिया और उस समय की Struggling Actress “कामिनी कौशल” को साइन कर लिया। लेकिन जब यह बात मधुबाला जी  को पता चली तो उन्होंने उस फिल्म को मात्र एक रूपये की fees पर करने को राजी हो गई।

उन दिनो “आसिफ” अपनी फिल्म “मुग़ल-ए-आज़म” में एक ऐसी अदाकारा को तलाश रहे थे जिसमें मुगलई शानो-शौकत हो। मधुबालाा में ये सभी खूबी शामिल थीं और उन्होने मधुबालाा और दिलीप कुमार को लेकर “मुग़ल-ए-आज़म” फिल्म बना डाली और ‘मुग़ल-ए-आज़म’ फिल्म को मधुबालाा की अदाकारी ने अमर बना दिया। मधुबाला और दिलीप कुमार का रोमांस इस फिल्म से निखर उठा था। मधुबाला ‘मुग़ल-ए-आज़म’ की शुटिंग के दौरान बहुत खुश रहती थी। मुग़ल-ए-आज़म बनने में काफी वक्त लग गया था तो मधुबालाा जी के अब्बू ने फिल्म के लिए एक लाख फीस मांगी जबकि उस समय दिलीप कुमार जी की fees 50,000 थी ।बाद में आसिफ ने यह समझौता मंजूर कर लिया और फिल्म superhit होने के बाद मधुबालाा जी को एक लाख से ज्यादा fees मिली । दिलीप कुमार जी को भी पांच लाख रूपये दिया गया ।

मधुबाला की किस्मत उनसे लगातार लुका-छिपी का खेल खेले जा रही थी। एक तरफ मुग़ल -ए-आज़म, चलती का नाम गाड़ी, मिस्टर एण्ड मिसेज जैसी अनेक फिल्में शौहरत की बुलंदियों पर थी और दूसरी तरफ उनका स्वास्थ्य  धीरे धीरे उनका साथ छोड़ रहा था। मधुबाला के जीवन में कई नायक आये लेकिन मधुबाला को एक ऐसे साथी की तलाश थी जो उनकी अच्छाईयों और बुराई समेत उन्हें अपना ले। मधुबाला को उन दिनों ‘किशोर कुमार’ का साथ बहुत अच्छा लगता था। लेकिन डॉक्टर्स के अनुसार मधुबाला के पास वक्त भी बहुत कम था।

उन्हें हार्ट सर्जरी के लिये लंदन ले जाया जा रहा था किन्तु उसके पहले ही ‘किशोर कुमार’ ने मधुबालाा से कोर्ट मैरिज कर ली और अपनी दुल्हन को london में इलाज के लिये भेज दिया ।  जब वह इलाज कराके भारत वापिस आयीं तो वह किशोर कुमार के साथ ही रहने लगीं। जिंदगी के अंतिम समय में वह सब कुछ भूल गई थी बस एक दिल की चाहत जुबां पर थी कि, “मुझे एक बार युसुफ साहब (दिलीप कुमार) को देखना है”! लेकिन उनकी यह तमन्ना भी अधूरी रह गई।



मात्र 36 वर्ष की उम्र में 23 फरवरी 1969 को अपनी इस आखिरी ख्वाहिश के साथ उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया । अपने छोटे से जीवनकाल के दौरान मधुबाला ने 70 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन पर तीन जीवनियां भी लिखी गई और बहुत से लेख प्रकाशित हुए । उनको इस दुनिया को अलविदा कहे कई दशक बीत चुके हैं लेकिन फिर भी अपने अनुपम सौन्दर्य और अभिनय की बदौलत आज भी वह भारतीय सिनेमा की Icon हैं। वर्ष 1990 में magazine द्वारा किये गए survey से इस बात का खुलासा हुआ था कि मधुबालाा उस दौर की अभिनेत्रियों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय थीं क्योंकि मधुबालाा जैसी सादगी,  भोलापन, मासूमियत और उनकी खूबसूरती की झलक अब तक किसी भी नायिका में नज़र नही आई ।


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