All Posts - सभी पोस्ट्स Indian Festival - भारतीय त्योहार Information and Knowledge - ज्ञान की बातें

छठ पूजा करने की विशेष विधि !

छठ हिंदू त्यौहार है जो हर साल लोगों द्वारा बहुत उत्सुकता के साथ मनाया जाता है। ये हिंदू धर्म का बहुत प्राचीन त्यौहार है, जो ऊर्जा के परमेश्वर के लिए समर्पित है जिन्हें सूर्य या सूर्य षष्ठी के रूप में भी जाना जाता है। लोग पृथ्वी पर हमेशा के लिये जीवन का आशीर्वाद पाने के लिए भगवान सूर्य को धन्यवाद देने के लिये ये त्यौहार मनाते हैं। लोग बहुत उत्साह से भगवान सूर्य की पूजा करते हैं और अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और बुजुर्गों के अच्छे के लिये सफलता और प्रगति के लिए प्रार्थना करते हैं।  ।इस दिन जल्दी उठकर पवित्र गंगा में नहाकर पूरे दिन उपवास रखने का रिवाज है, यहाँ तक कि वो पानी भी नहीं पीते और एक लम्बे समय तक पानी में खड़े रहते हैं। वो उगते हुये सूर्य को प्रसाद और अर्घ्य देते हैं। ये भारत के विभिन्न राज्यों में मनाया जाता है ।


छठ पूजा शुभ मुहूर्त 2017 :

छठ पर्व तिथि : 26 अक्तूबर 2017, बृहस्पतिवार

छठ तिथि को सूर्योदय का समय : प्रातः काल 06:28 (26 अक्तूबर 2017)

सूर्यास्त, छठ तिथि : सांय काल 05:40 (26 अक्तूबर 2017)

षष्ठी तिथि प्रारंभ : प्रात: 09:37 बजे से (25 अक्तूबर 2017)

षष्ठी तिथि समाप्त : दोपहर 12:15 बजे तक (26 अक्तूबर 2017

छठ पूजन सामग्री :

India Hindu Devotees perform a ritual on the river hooghly on the occasion of 'Chhat Puja' in Kolkata on Saturday 24 October 2009 in Eastern India City ----- WN/BHASKAR MALLICK

छठ पूजन सामग्री में बाँस या पितल की सूप , बॉस के फट्टे से बने दौरा व डलिया , पानी वाला नारियल, गन्ना पत्तो के साथ , सुथनी, शकरकंदी, डगरा, हल्दी और अदरक का पौधा , नाशपाती , नींबू बड़ा , शहद की डिब्बी , पान सुपारी , कैराव , सिंदूर , कपूर , कुमकुम , चावल अक्षत के लिए, चन्दन आदि और इसके अलावा घर पर बने हुए पकवान जैसे खस्ता, पुवा, ठेकुवा , चावल के लड्डू, जिसे लड़ुआ भी कहा जाता है इत्यादि शामिल हैं । 



छठ पूजा विधि :

छठ पूजा विधि में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखे।

व्रत करने वाले नए कपड़ें पहने और उसमें ऐसे कपडे का उपयोग करे जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की गयी हो।

स्त्री साड़ी तथा पुरुष धोती और बनियान का उपयोग कर सकते हैं।

पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती फर्श पर एक कंबल या चादर पर ही सोएं ।

पर्व से दो दिन पूर्व चतुर्थी पर स्नानादि से निवृत्त होकर भोजन किया जाता है।

छठ पूजा में पवत्रिता का खास ध्यान रखना पड़ता है । व्रती को निराजल व्रत रखना चाहिए अपवाद में वृद्ध और मरीज पानी पी सकते है । आस-पास अगर कोई जल संग्रह स्थान जैसे नदी , पोखर , तालाब इत्यादि हो अगर इनमे से कुछ भी न हो तो कही पर गड्ढा खोदकर साफ़ पानी भरकर छठ पूजा का घाट बना सकते है ।



छठ पूजा सामग्री को सूप में सजाकर रख लीजिये और दौरा में बांध लीजिये और साथ में गन्ने को भी छठ घाट पर ले जाईये । घाट पर पहुच कर सूप को बाहर निकाल ले और धूप पुष्प बत्ती इत्यादि से पूजन करके सूप को सजा कर रख लें। अर्घ्य काल से पहले व्रती को पानी में उतरकर स्नान करना चाहिए।

chhath puja 3

इसके बाद कमर से नीचे सूर्य भगवान की ओर पानी में खड़े होकर हाथ जोड़कर अपने करीबियों के लिए सुख और स्वास्थय के लिए मनोकामना करे । इसके बाद हाथो में सूप लेकर केला एवं अन्य फल , अलोना प्रसाद, ईख आदि रखकर उसे पीले वस्त्र से ढक दें | उसके बाद दीप जलाकर सूप में रख दीजिये और सूप को दोनों हाथों में थामकर अर्घ्य की तैयारी करें।

 

छठ पूजा अर्घ्य विधि :

chhath evening

छठ पूजा में अर्घ्य देने के लिए जल और दूध का इस्तेमाल किया जाता है । छोटे पात्र में जल अथवा दूध लेकर सूर्य भगवान की अस्तुति इन मंत्रो से करें।

ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥

इसके बाद दो से पांच बार सूप के छोर पर जल छोडे और धूप बत्ती दिखाते हुए अपने और अपनों के सुख और स्वास्थ्य के लिए माँ छठ और भगवान सूर्य से मनोकामना करें। 

छठ पूजा सूर्योदय अर्घ्य विधि :

chhath puja morning

इसके बाद घर लौटकर अगले दिन यानि की चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह-सुबह सूर्य निकलने से पहले छठ का डाला लेकर घाट पर पहुँच जाईये । इसके बाद संध्या अर्घ्य की तरह ही सूर्योदय अर्घ्य की तैयारी करें और अंत में व्रति कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत को सम्पूर्ण करें ।

छठ व्रत की पूजा विधि :

chhath vrat vidhi

पर्व से दो दिन पूर्व चतुर्थी पर स्नानादि से निवृत्त होकर भोजन किया जाता है। पंचमी को उपवास करके संध्याकाळ में किसी तालाब या नदी में स्नान करके सूर्य भगवान को अर्ध्य दिया जाता है| तत्पश्चात अलोना भोजन किया जाता है। षष्ठी के दिन प्रात:काल स्नानादि के बाद संकल्प लिया जाता है| संकल्प लेते समय निम्न मन्त्रों का उच्चारण करें।

ऊं अद्य अमुकगोत्रोअमुकनामाहं मम सर्व
पापनक्षयपूर्वकशरीरारोग्यार्थ श्री
सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।

अर्ध्य मन्त्र :

अर्ध्य देने की भी एक विधि होती है| एक बांस के सूप में केला एवं अन्य फल, अलोना प्रसाद, ईख आदि रखकर उसे पीले वस्त्र से ढक दें| उसके बाद दीप जलाकर सूप में रख दीजिये और सूप को दोनों हाथों में लेकर निम्न मन्त्र का उच्चारण करते हुए तीन बार अस्त होते हुए सूर्यदेव को अर्ध्य दें।

ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥

सूर्य पूजा का संदर्भ :

chhath puja sun-stayreading

छठ पर्व सूर्य की आराधना का पर्व है, जिसे हिन्दू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। हिन्दू धर्म के देवताओं में सूर्य ऐसे देवता हैं जिन्हें मूर्त रूप में देखा जा सकता है। सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।

छठ पर्व की मान्यता :

chhath puja india

मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस महाव्रत को निष्ठा भाव से विधिपूर्वक संपन्न करता है वह संतान सुख से कभी अछूता नहीं रहता है। इस महाव्रत के फलस्वरूप व्यक्ति को न केवल संतान की प्राप्ति होती है बल्कि उसके सारे कष्ट भी समाप्त हो जाते हैं।


आपको हमारी यह Post कैसी लगी. नीचे दिए गए Comment Box में जरूर लिखें. यदि आपको हमारी ये Post पसंद आए तो Please अपने Friends के साथ Share जरूर करें. और हाँ अगर आपने अब तक Free e -Mail Subscription activate नहीं किया है तो नयी पोस्ट ईमेल में प्राप्त करने के लिए Sign Up जरूर करें.

Happy Reading !

 

Tags

About the author

StayReading.com

StayReading.com का Main Motive ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रेरित करना और आगे बढ़ने में Help करना है। Inspirational और Motivational Quotes का अनमोल संग्रह है, जो आपको प्रेरित करेगा की आप अपने जीवन को नये अंदाज में देखें। हर Quotesऔर Stories का संग्रह आपके नज़रिए को व्यापक करती है और बताती है की पूर्ण इंसान बनने का मतलब क्या होता है। यह हमे सिखाती है की हम भी अपने जीवन में ज़्यदा प्रेम, साहस और करुणा कैसे हासिल कर सकते हैं।

Add Comment

Click here to post a comment

Sponsors links

FREE Email Subscription