• रिच डैड पुअर डैड (Rich Dad Poor Dad) – About Book in Hindi

    रिच डैड पुअर डैड रोबर्ट कियोस्की लोगो को करोड़पति बनना सिखाते हैं ,,, इसलिए लोग -बाग़ उन्हें करोड़पति प्रोफेसर कहते हैं । “लोग पैसे की समस्या से इसलिए जूझते हैं क्योंकि वे सालों तक स्कूल जाने के बाद भी पैसे के बारे में कुछ नहीं सीख पाते। परिणाम वह होता है कि लोग पैसे के लिए काम करना तो सीख जाते हैं ,,, परंतु पैसा उनके लिए काम करे ,यह कभी नहीं सीख पाते। “ – रोबर्ट कियोसाकी रिच डैड पुअर डैड के लेखक रिच डैड पुअर डैड o यह मिथक तोड़ती है कि अमीर बनने के लिए ज़्यादा कमाना ज़रुरी है। o यह साबित करती है कि आपका घर संपत्ति नहीं है। o माता -पिता को बताती है कि पैसे के बारे में उनके बच्चो को स्कूलों में कुछ नहीं सिखाया जाता है और इसलये उन्हें स्कूल के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। o हमेशा के लिए यह साफ़ साफ़

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    रहस्य (Book Summary)

    रहस्य आप अपने हाथों में एक महान रहस्य (Great Mystery) थामें हैं…. यह युगों -युगों से हस्तांतरित (Transferrable) होता आ रहा है। इसे सभी पाना (Accept) चाहते थे, इसे छिपाया (Hide) गया , ये खो (Lost) गया , इसे चुराया (Steal) गया और ढेर सारी दौलत (Wealth) में ख़रीदा गया।  सदियों पुराना यह रहस्य (Mystery)  इतिहास (History) के कुछ सबसे मशहूर लोगों (Popular Peoples) को मालुम था : प्लेटो, गैलिलियो , बीथोवन , एडिसन , कारनेगी, आइंस्टीन तथा अन्य महान आविष्कारकों (Inventors) , धर्मशास्त्रियों , वैज्ञानिकों  और चिंतकों को।  अब यह रहस्य (Mystery) पूरी दुनिया (All over World) को बताया जा रहा है। “जब आप यह रहस्य (Mystery) सीखेंगे , तो आप जान जायँगे कि आप अपने मनचाहे व्यक्तिगत (Individuals) को कैसे पा सकते हैं।  आप जान जायँगे कि आप सचमुच (Real) कौन हैं।  आप  उस सच्ची भव्यता को जान जायँगे , जो जीवन में आपका इंतज़ार (Wait) कर रही

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    रिच डैड्स, (कैशफ़्लो क्वाड्रेन्ट आर्थिक स्वतंत्रता की कुंजी) Book Summary

      रिच डैड्स, कैशफ़्लो क्वाड्रेन्ट आर्थिक स्वतंत्रता की कुंजी इस पुस्तक को पढ़ने से आपको निम्न चीज़ों के बारे में पता चलेगा :-  आपको यह रहस्य (Mystery) बतायेगी कि कुछ लोग कम काम करने के बावजूद ज्यादा पैसे  क्यों कमाते  (Earn) हैं, कम टैक्स क्यों देते हैं और वित्तीय मामलो (Financial Matter) में बाकी लोगो से ज़्यादा सुरक्षित (Safe) क्यों महसूस (Feel)  करते हैं।  इसके लिए सिर्फ यह  जानने को जरुरत है कि कब किस क्वाड्रेन्ट में काम किया जाए। क्या अपने कभी सोचा है ?  ० कंपनी के मालिक और मज़दूर में क्या फर्क है ?    ०  कुछ निवेशक (Investors) बहुत काम जोखिम (Risk) लेकर अमीर बन जाते हैं , जबकि ज्यादातर निवेशक (Mostly Investors) जैसे- तैसे  अपनी   मूल पूंजी निकाल पाते हैं ? ०औद्योगिक युग में ज्यादातर माता -पिता क्यों चाहते  थे कि उनके बच्चे डॉक्टर , अकाउंटेंट या वकील  बनें..और सुचना (Information) युग (Generation) में इन्ही व्यवसायों

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    Rahim ke anmol dohe (रहीम के अनमोल दोहे)

    Born : 17 December 1556 Lahore, Pakistan Died : 1627 Agra, India Burial : Tomb of Abdul Rahim Khan-i-Khana, Delhi Spouse: Mah Banu Begum Issue : Jana Begum, Two sons House : Jalayirid Father : Bairam Khan Mother : Daughter of Jamal Khan of Mewat Religion : Islam रहीम जी का व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली था| यह मुसलमान होकर भी कृष्ण भक्त थे| इन्होंने खुद को “रहिमन” कहकर भी सम्बोधित किया है| इनके काव्य में नीति, भक्ति, प्रेम और श्रृंगार का सुन्दर समावेश मिलता है| रहीम जी ने अपने अनुभवों को अति सरल व सहजता से जिस शैली में अभिव्यक्त किया है वह वास्तव में अदभुत है| उनकी कविताओं, छंदों, दोहों में पूर्वी अवधी, ब्रज भाषा तथा खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है| पर मुख्य रूप से ब्रज भाषा का ही प्रयोग हुआ है| भाषा को सरल, सरस व मधुर बनाने के लिए इन्होंने तदभव शब्दों का अधिक प्रयोग किया है|

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    कबीर दास जी के दोहे (Part-1)

    कबीर दास जी का जन्म सन् 1398 में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वाराणसी के निकट “लहराता” नामक स्थान पर हुआ था । कबीर को बचपन से ही साधु संगति बहुत प्रिय थी। कपड़ा बुनने का पैतृक व्यवसाय वो आजीवन करते रहे। बालावस्था से ही कबीर के चमत्कारिक व्यक्तित्व की आभा हर तरफ फैलने लगी थी। कबीर का बचपन बहुत सी रूढीयों से जूझते हुए बीता था। उस दौरान ये सोच प्रबल थी कि इंसान अमीर है तो अच्छा है और कोई गरीब है तो उसे इंसान ही न माना जाये। उस समय आदमी और आदमी के बीच फर्क साफ नजर आता था और अमीरों द्वारा गरीबों एवं निम्नजाती के लोगों का शोषण होता था। कबीरदास जी सदैव सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध थे और इसे कैसे दूर किया जाये इसी विचार में रहते थे। कबीर वो पहचान है जिन्होने, जाति-वर्ग की दीवार  को गिराकर एक अद्भुत संसार की कल्पना की। हमने

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