• Super 30 founder “आनंद कुमार” जो गरीब छात्रों को IIT तक पहुँचाने का जज्बा रखते हैं!

    हेल्लो दोस्तों! आज हम ऐसे शख्स बात करने जा रहे हैं जिन्होंने बहुत से गरीब प्रतिभाशाली बच्चों को  IIT में जाने का सपना साकार कर दिखाया है। जी हाँ ! हम बात कर रहे हैं आनंद कुमार जी की जिन्होंने प्रतिभाशाली बच्चों के लिए अँधेरे में रौशनी की किरण का काम किया है। यह Super 30  के संस्थापक हैं जो बिना एक पैसे शुल्क लिए गरीब प्रतिभाशाली बच्चों को IIT में जाने का सपना साकार करते हैं। तो आइये दोस्तों जानते हैं आनंद कुमार जी के Super 30 के बारे में :- Super 30 आनंद कुमार जी का start किया हुआ एक प्रोग्राम है जिसमे वह हर साल पूरे बिहार से 30 ऐसे बच्चों को चुनते हैं जो पढ़ने की प्रतिभा रखते हैं पर साथ में इतने गरीब हैं कि उनके माता-पिता उनको ठीक से पढ़ा-लिखा नहीं सकते। आनंद जी एक परीक्षा के माध्यम से ऐसे बच्चों का चयन कर

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    राधिका अग्रवाल (Co-founder of Shopclues) की success story!

    आज हम ऐसे इंसान की बात करने जा रहे हैं जिसने ऊँची उड़ान भरकर अपने सपनों को पूरा किया है, क्योंकि सपने को हकीकत बनने में समय नहीं लगता  अगर आपका उसमे दृढ संकल्प  और कड़ी मेहनत लगी हो ।बस हमें यह याद रखना है कि हमारे अंदर भी वो ताकत है और वो जज़्बा है कि हम भी ऊंचाइयों तक जा सकते हैं । तो आइए आज हम आपको एक ऐसी ही महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने सपने को साकार कर एक मिसाल कायम कर दी। जी हाँ !!! हम बात कर रहे हैं ‘Radhika Aggarwal’ की जो ShopClues कंपनी की Co-founder और Chief Marketing Officer हैं । राधिका ने online shopping website “Shopclues” की शुरुआत वर्ष 2011 में गुडगाँव में की थी। 10 लोगो से start हुई यह company आज  success  e-commerce websites में से एक है। आज ShopClues में 1000 से अधिक

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    हॉकी के महानायक “Dhanraj Pillay” की Success Story”!

    नाम : धनराज पिल्लै। जन्म :16 जुलाई, 1968. खेल : हॉकी उपलब्धियां : वर्ष 1999-2000 में उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष 2000 में उन्हें नागरिक सम्मान पद्म श्री प्रदान किया गया| जर्मनी में आयोजित 2002 चैंपियंस ट्रॉफी में उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया। 1995 में उन्हें ‘अर्जुन पुरस्कार’ से नवाजा गया | 1998-99 के लिए धनराज को ‘के.के. बिरला फाउंडेशन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया | 1989 में एशिया कप में वह पहली बार अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर शामिल हुए और टीम ने रजत पदक भी जीता । दोस्तों,आज हम ऐसे महान शख्स के बारे बताने जा रहे हैं जिसने शुरू से ही बड़े बड़े सपने देख लिए थे और सपना कोई भी इंसान चाहे वो कैसा भी हो देख सकता है, पर उनमे से गिने-चुने ही लोग होते हैं जो इन्हें पूरा करने के लिए डटे रहते हैं और उन्ही लोगों में से

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    महिला पहलवान “Geeta Phogat” की Success Story !

    नाम : गीता फोगाट जन्म :15 दिसम्बर 1988 ,हरियाणा -बिलाली गांव ! पिता : महावीर सिंह फोगाट माता : दया कौर खेल : पहलवानी उपलब्धियां : राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गयीं। पहली भारतीय महिला पहलवान है जिन्होंने ओलम्पिक में qualify किया। इनके जीवन पर आधारित फिल्म दंगल बॉलीवुड की हिट फिल्मों में से एक है। गीता फोगाट एक ऐसे गाँव से थीं जहाँ बेटी का होना अभिशाप माना जाता था। बेटी के पैदा होते ही खुशियों की जगह दुःख का मातम छा जाता था। इतना ही नहीं लड़कियों को पढ़ने के लिए स्कूल जाना भी मना था और आज भी हमारे देश में केवल बेटों की चाह रखने वाले लोगों की कमी नहीं है । शुरुआत में तो  गीता के माता-पिता की भी सोच कुछ ऐसी ही थी। बेटे की चाह में वह चार बेटियों के पिता बन गए, जिनमे गीता सबसे बड़ी हैं। लेकिन

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    कैसे बने “Suhas Gopinath” दुनिया के सबसे कम उम्र के CEO !

    आज हम आपको एक ऐसे शख्स से मिलवाने जा रहे हैं  जो दुनिया का  Youngest CEO है । क्या आप जानते हैं कि यह पद बहुत ही जिम्मेदारी भरा है। तो ज़रा सोचिये इतनी काम उम्र वाला यह व्यक्ति इतना कैसे manage करता होगा। यह व्यक्ति कोई foreigner नहीं है बल्कि अपने India से belong करता है जिसने अपनी पढाई बीच में ही छोड़ दी और दुनिया का youngest CEO बन गया । तो आइये हम आपको दुनिया के youngest CEO की सफलता भरी जिंदगी के बारे में बताते हैं :- ‘सुहास गोपीनाथ ‘ जिन्होंने  Global Inc की स्थापना की  थी तो वह सिर्फ चौदह वर्ष के थे और तब उन्हें खुद भी नहीं पता था कि वो दुनिया के सबसे कम उम्र के CEO बन गए हैं। उन्होंने यह काम Bangalore के एक छोटे से Cyber-Cafe में बैठ कर किया था और आज Globals Inc एक multi-million dollar company

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    कल्पना सरोज की संघर्ष भरी सफलता !!!

    आज हम उस दलित पिछड़े समाज की एक लड़की की कहानी बताने जा रहे हैं जिसको बचपन से ही कई कठिनाइयों से जूझना पड़ा। ससुराल वालों का अत्याचार सहना पड़ा, दो रुपये रोज की नौकरी करनी पड़ी और उन्होंने आत्महत्या करने के लिए ज़हर तक पी लिया। लेकिन पता है आज वही कल्पना सरोज 500 करोड़ से भी ऊपर की Business की Owner हैं । तो आइये जानते हैं कल्पना सरोज से सम्बंधित जीवन की कहानी :- कल्पना सरोज का जन्म 1961 में महाराष्ट्र के अकोला जिले के छोटे से गाँव रोपरखेड़ा के गरीब दलित परिवार में  हुआ था । कल्पना के पिता एक पुलिस हवलदार थे और उनका वेतन मात्र 300 रूपये था जिसमे पूरे परिवार का खर्च चलता था। उनका पूरा परिवार पुलिस क्वार्टर में रहता था और कल्पना पास के ही सरकारी स्कूल में पढने जाती थीं। बचपन में उनके गाँव में बिजली नहीं थी। स्कूल से लौटते

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    रिक्शेवाले का बेटा बना IAS Officer !!!

    आज  मैं  एक  ऐसे व्यक्ति की  कहानी  बताने जा  रहा  हूँ  जो  हज़ारो  दिक्कतों  के  बावजूद  अपने  दृढ  निश्चय  और  मेहनत  के  बल  पर  IAS officer बनने में सक्षम हो सका क्योंकि प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में परीक्षार्थी IAS officer बनने  की  चाह  में  Civil Services के exam में  बैठते  हैं  पर  इनमे  से 0.025 % से  भी  कम  लोग  IAS officer बन  पाते हैं ।इससे आप आसानी से  अंदाज़ा  लगा  सकते  हैं  कि  IAS exam Clear करना कितना  मुश्किल है और जो  कोई  भी  इस  exam को  clear करता  है  उसके  लिए  समाज में  एक  अलग  ही छवि बन  जाती  है और  यह सब करने  वाला  किसी  बहुत  ही  साधारण  Family background से  हो  तो  उसके  लिए  तो मन  में  और  भी  respect आना  आवश्यक है। मैं बात कर रहा हूँ “गोविन्द जायसवाल” की ! जिनके पिता  एक  रिक्शा -चालक  थे। बनारस  की तंग गलियों  में एक छोटे से

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    कैसे एक भिखारी ने बनाई करोड़ों की कंपनी !!!

    आज हम एक ऐसे इंसान के बारे में बताने जा रहे हैं , जो अपनी मेहनत और लगन के दम पर करोड़पति बन गया। जो व्यक्ति कभी घर-घर जाकर भीख माँगा करता था। आज उसकी कंपनी का टर्नओवर लगभग 30 करोड़ रुपए है बल्कि उसकी कंपनी की वजह से लगभग 150 अन्य घरों में चूल्हा भी जलता है। आप सोच रहे होंगे कि आखिर कौन? जी ! हाँ हम बात कर रहे हैं ‘रेणुका अराध्य’ की जिनकी जिंदगी की शुरुआत बेंगलुरु के निकट गोपासन्द्र गाँव से हुई | उनके पिता एक छोटे से स्थानीय मंदिर के पुजारी थे, जो अपने परिवार को दान-पुण्य से मिले पैसों से घर चलाते थे लेकिन दान-पुण्य के पैसों से उनका घर ढंग से नहीं चल पाता था इसलिए वे आस-पास गाँवों में जाकर भीख में अनाज माँग कर लाया करते थे। फिर उसी अनाज को बाज़ार में बेचकर जो पैसे मिलते उससे अपने परिवार

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    कैसे एक बस कंडक्टर बना सुपरस्टार !!!

    आज हम ऐसी महान हस्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने फर्श से अर्श तक आने की कहावत को सच साबित करके बताया। जी हाँ ! हम बात कर रहे हैं सुपरस्टार “रजनीकांत” जी की। जिन्होंने बड़ी बड़ी सफलताएं हासिल कर अपने अभावों और संघर्षों में इतिहास रचा है और वैसा शायद पूरी दुनिया में कम ही लोग कर पाएं होंगे क्योंकि एक कारपेंटर से कुली बनना फिर कुली से बी.टी.एस. कंडक्टर और फिर एक कंडक्टर से विश्व के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध सुपरस्टार बनने तक का सफ़र कितना परिश्रम भरा होगा ये हम सब सोच ही सकते हैं। जिस स्थान पर आज रजनीकांत हैं उसके लिए जितना परिश्रम और त्याग चाहिए होता है शायद रजनीकांत जी ने उससे कहीं ज्यादा किया है| रजनीकांत जी का जन्म 12 दिसम्बर 1950 को कर्नाटक के बैंगलोर में एक मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में हुआ था।  वे अपने परिवार में सबसे छोटे थे। 

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    छोटी सी उम्र में कैसे बना यह युवक 360 करोड़ की कंपनी का मालिक !

    क्या आप विश्वास करेंगे कि एक उम्र जब हम अपने आपको पूरी जिंदगी के लिए तैयार करते है और एक ऐसी ही उम्र में जीवन के ऐसे नाजुक पड़ाव पर एक युवा ने अपने सपने को साकार करने के लिए रोज 16 घंटे काम कर लगभग 360 करोड़ की कंपनी की नींव रख दी !!! उस युवा का नाम “रीतेश अग्रवाल” है जिनका जन्म 16 नवम्बर 1993 को उड़ीसा राज्य के जिले कटक बीसाम के एक व्यवसायिक परिवार में हुआ । जिसने लगभग 20 वर्ष की कम उम्र में “Oyo Rooms” नाम की कंपनी की शुरूआत करके बड़े-बड़े अनुभवी उद्यमियों और निवेशकों को आश्चर्य में डाल दिया। Oyo Rooms का मुख्य उद्देश्य Travellers को सस्ते दामों पर बेहतरीन सुविधाओं के साथ देश के बड़े शहरों के होटलों में कमरा उपलब्ध कराना हैं। रीतेश सामान्य बुद्धी वाले युवा हैं। लेकिन कभी-कभी सामान्य से दिखने वाले लोग भी ऐसे काम कर जाते

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