• आज मेरे बेटे का स्कूल में पहला दिन Letter by Abraham Lincoln !

    दोस्तों ! स्वागत करते हैं आपका एक बार फिर से Stayreading.Com पर। हमने पिछले दो Article में “जीत आपकी” Book से related life changing posts डाली थी और हमें उम्मीद है कि आपको वो सभी articles पसंद आये होंगे। अगर आपने अभी तक वह article read नहीं किया तो आप नीचे दी हुई link पर click करके पढ़ सकते हैं।  “बहानेबाजी” से छुटकारा कैसे पाएं ! Shiv Khera : Life Changing Book “जीत आपकी” ! दोस्तों यह तो आप अच्छे से जानते ही हैं कि इस दुनिया में हर इंसान बड़ा बनने का सपना देखता है। लेकिन कुछ ही लोग अपने सपने को पूरा कर पाते है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि ऐसा क्या कारण हो सकता है जिससे लोग कामयाब नहीं हो पाते। इसका मुख्य कारण है हमारी आदत और एक पुरानी सोच जो हम बचपन से सीख तो जाते हैं, लेकिन उसमे बदलाव नहीं कर पाते । क्योंकि हमारी

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    “बहानेबाजी” से छुटकारा कैसे पाएं !

    दोस्तों ! स्वागत करते हैं आपका एक बार फिर से Stayreading.Com पर। जैसा कि आपने पिछले Article में देखा कि हमने “जीत आपकी” Book से related life changing quotations डाली थी, जो आपके लिए काफी Motivated साबित रही होगी। इसी तरह आज हम आपके लिए “जीत आपकी” book से एक ऐसा Topic ढूंढ के लाएं हैं, जो आपको विजेता और बहानेबाज़ लोगों के बीच एक गहरा अंतर दर्शाएगा। दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं इस दुनिया में ज्यादातर लोग अपने बहानाबाजी के कारण सफल ही नहीं हो पाते और बाद में अपनी किस्मत को कोसते रहते हैं। बहानेबाज़ी करने की यह बीमारी लोगों के अंदर बढती जा रही है। जिसका सिर्फ एक ही इलाज़ है “Only Focus On Your Goal” ! एक विजेता जो होता है वह हर कार्य को बारीकी से जांच परख करता है,लेकिन कभी बहानेबाज़ी नहीं करता क्योंकि यह कार्य केवल हारने वाले लोग ही करते हैं।

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    अपनी असफलता से कैसे सफल हुए यह सभी महापुरुष !

    हेल्लो दोस्तों ! स्वागत है आपका एक बार फिर से Stayreading.com पर। आज हम आपके लिए एक ऐसा article लेकर के आये हैं जो आपके जीवन में  motivation जरूर देगा। अक्सर आपने भी कहीं न कहीं सुना ही होगा कि अगर जीवन में कामयाब होना है तो महापुरुषों की सफल जिंदगी से ज्यादा उनकी असफल प्रयासों के बारे में पढ़ो। यह कहना ठीक भी है क्योंकि Success stories तो आपके केवल अच्छे और सफल परिणामों के बारे में बताएगी परन्तु कि हुई गलतियों से सफल होने के लिए महापुरुषों की failure stories आपको बहुत कुछ सिखाएगी । जब आप कोई भी कार्य शुरू करते हैं तो उसके असफल होने के कई कारण भी होते हैं परन्तु इसका मतलव यह नहीं कि आप उस कार्य को करना ही छोड़ दें। अगर आप किसी कार्य में असफल होते हैं तो समझ लीजिये कि अपने सफलता की एक सीढ़ी पर चढ़ चुके हैं

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    महान संगीतकार “A.R Rehman” की सफलता भरी जीवनी !

    दोस्तों ! ए. आर रहमान रहमान हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार हैं। इनका पूरा नाम “अल्लाह रक्खा रहमान” है । जन्म के समय रहमान का नाम “ए. एस. दिलीपकुमार मुदलियार” रखा गया था, जिसे बाद में बदलकर वे ए. आर. रहमान बनें और आपको पता है इस नाम के पीछे भी कहानी जुडी हुई है , जो हम आपको आगे बताने वाले हैं। ए. आर रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 को चेन्नई में हुआ था । रहमान ने अपनी मातृभाषा तमिऴ के अलावा हिंदी और कई अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी संगीत दिया है। टाइम्स पत्रिका ने उन्हें “मोजार्ट ऑफ मद्रास” की उपाधि दे रखी है । रहमान “गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड” से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय हैं। ए. आर. रहमान ऐसे पहले भारतीय हैं जिन्हें ब्रिटिश भारतीय फिल्म “स्लम डॉग मिलेनियर” में उनके संगीत के लिए तीन ऑस्कर नामांकन हासिल हुआ है। इसी फिल्म के गीत ‘जय

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    चार मोमबत्तियों की कहानी (Motivational Story) !

    आइए दोस्तों ! आज हम आपके लिए एक ऐसी Motivational Story लेकर के आये हैं। जिसे पढ़ने के बाद आप इस कहानी की तारीफ करते पीछे नहीं हटेंगे। यह कहानी आपको Motivation जरूर करेगी। यह कहानी चार मोमबत्तियों की है , जो वर्तमान समय में चल रही गतिविधियों के बारे में बता रही हैं। तो चलिये दोस्तों ! हम आपको यह Motivational Story Share करने जा रहे हैं , जो आपको जरूर पसंद आएगी।   रात का समय था। चारों तरफ सन्नाटा फैला हुआ था। घर के कमरे के अंदर चार मोमबत्तियां जल रहीं थी। एकांत पाकर वे सब एक दूसरे से बात कर रहीं थी। तभी पहली मोमबत्ती बोली,’मैं शान्ति हूँ, पर मुझे लगता है ,अब इस दुनिया को मेरी जरुरत नहीं है। हर तरफ देखो तो लूट-मार मची हुई है। मैं यहाँ अब और नहीं रह सकती और ऐसा कहकर वह मोमबत्ती कुछ देर में बुझ गई।  तभी दूसरी मोमबत्ती बोली,”मैं विश्वास

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    बिस्तर चलने लगा ! (Hindi Story)

    हेल्लो दोस्तों ! आपने अपने बचपन में नाना-नानी या दादा-दादी से कहानी सुनी ही होगी। वह वक़्त ऐसा था जब हमें किसी भी चीज़ की टेंशन नहीं रहती थी और हम कहानी सुनने के लिए हमेशा से ही बेताब रहा करते थे और कहानी पूरी होती नहीं कि हमें अचानक नींद भी आने लग जाती थी। तो चलिए दोस्तों आज हम आप के लिए एक ऐसी ही मज़ेदार कहानी लेकर आये हैं जिसे पढ़ने के बाद आप भी अपने बचपन की यादों  में खो जाएंगे।   जब मैं लगभग पांच-छः साल का था। उस वक़्त हमने अपने घर के लिए नया रसोइया रखा था जिसका नाम रमेश था। पहले वह एक शिकारी के यहाँ पर रसोइया का काम करता था। जब वह शिकारी वहां से विदेश चला गया तो रमेश हमारे यहाँ काम करने लग गया। मेरे पापा हमेशा से ही एक व्यस्त व्यक्ति थे और मम्मी का क्या कहना वह तो दिन

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    माँ का त्याग कभी नहीं भूलना चाहिए ! (Inspirational Story)

    आइए दोस्तों ! आज हम आपके लिए माँ-बेटे की एक ऐसी भावुक कहानी प्रस्तुत करने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर रमन जैसे लोगों को भी अपनी माँ का महत्व पता चलेगा क्योंकि एक माँ कभी नहीं चाहेगी कि उसका बेटा तकलीफ में रहे !चाहे बेटा माँ को कुछ न मानता हो लेकिन माँ हमेशा यही सोचती रहती है कि मेरा बेटा जहाँ भी रहे बस ! हमेशा ख़ुशी से रहे। तो दोस्तों चलिए हम आपको बताते हैं इस कहानी के बारे में जिसका नाम है “माँ का त्याग कभी नहीं भूलना चाहिए” !  रमन नाम का एक लड़का था , जिसकी माँ की एक आँख नहीं थी और रमन उनके कलेजे का टुकड़ा था। लेकिन रमन जो कि उनका लाडला था उसको अपनी माँ का यह रूप बिलकुल भी पसंद नहीं था। रमन के पिता की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी थी और रमन की माँ मज़दूरी करके घर का खर्चा चलाकर

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    व्यवहार और व्यक्तित्व ही इंसान की पहचान कराता है। (कहानी)

    हमने अपने प्रयासों से यह कहानी आपके लिए प्रस्तुत की है, जो आपके अंदर, अच्छे-बुरे के द्वन्द को तो ख़त्म करेगी ही साथ ही आपको आपके जीवन के प्रति निष्ठवान और दुसरो के प्रति दयालु तथा प्रत्येक स्तिथि से किस प्रकार निकला  जाए, उसमे भी आपकी सहायता  करेगी। हमारी प्रत्येक कहानी का यही उद्देश्य है कि वे आपके अंदर के अच्छे व्यक्ति को बाहर लाये तथा इससे पढ़कर आपको संतुष्टि मिले और ऐसे  विचार आये जो आपके कार्य या जीवन के लिए कारगर सिद्ध हो।  सुमित ने स्कूल से आते ही अपना बैग दीवार पर फ़ेंक मारा । उसने सोच लिया था कि वह अब से स्कूल नहीं जायगा। जब यह बात उसकी माँ ने सुनी तो वह हैरान हो गयी ,लेकिन उस समय उसकी माँ ने सुमित से इस विषय पर कोई बात नहीं की। कुछ घंटों के बाद सुमित का गुस्सा शांत होने लगा। उसकी माँ ने सोचा

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    कृष्ण दीवानी “मीराबाई” का जीवन परिचय !

    मीराबाई हिंदी साहित्य जगत की कवियत्रियों में अग्रणीय स्थान रखती हैं | मीराबाई ने इस संसार को कई कविताएं, दोहे, पद आदि प्रदान किए हैं जिनका यह संसार सदैव ऋणी रहेगा। इनकी कविताएं, दोहे एवं पद प्रमुखता कृष्ण भक्ति पर आधारित है | महान कवयित्री मीराबाई का जन्म वर्ष 1573 में जोधपुर में चोकड़ी नामक गाँव में हुआ था। मीरा बाई 16वी शताब्दी की हिन्दू आध्यात्मिक कवियित्री और भगवान कृष्णा की भक्त थी। लोगो के अनुसार संत मीराबाई एक आध्यात्मिक कवियित्री थी और उत्तर भारतीय हिन्दू परंपरा के अनुसार वह एक भक्ति संत थी। इनका बचपन से ही कृष्णभक्ति में रुचि थी एवं यह मंदिरों में जाकर वहाँ मौजूद कृष्णभक्तों के सामने कृष्ण जी की मूर्ति के आगे नाचती रहती थीं। मीराबाई दिन-रात कृष्णा भक्ति में ही लीन रहती और कृष्णा को ही अपना पति मानती थी। भगवान कृष्णा के रूप का वर्णन करते हुए संत मीराबाई हजारो भक्तिमय कविताओ

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    रामायण के रचयिता “महर्षि वाल्मीकि” का जीवन परिचय

    रामायण के रचयिता “महर्षि वाल्मीकि” का जीवन बहुत ही रोचक व प्रेरणादायक है और आज हम उनके इस लेख में जानेंगे कि कैसे वह डाकू रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बन गए और रामायण जैसे बड़े महाकाव्य की रचना भी कर डाली । हिन्दू पंचांग के अनुसार वाल्मीकि जयंती आश्विनी माह की पुर्णिमा के दिन धूमधाम से मनाया जाता है। वैसे तो वाल्मीकि जयंती दिवस पूरे भारत देश में उत्साह से मनाई जाती है लेकिन उत्तर भारत में इस दिवस को और ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। उत्तर भारतीय लोग वाल्मीकि जयंती को ‘प्रकट दिवस’ के रूप में मनाते हैं। महर्षि वाल्मीकि “आदिकवि” के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। उनको यह उपाधि सर्वप्रथम ‘श्लोक’ निर्माण करने पर दी गयी थी।   नाम : महर्षि वाल्मीकि ! अन्य प्रसिद्ध नाम : रत्नाकर, अग्नि शर्मा ! जन्म : त्रेता युग ! माता-पिता : चर्षणी ,प्रचेता ! उपलब्धियां : आदि कवी एवं  वाल्मीकि रामयण के

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