• दिखा है रुप त्योहारी ! (गीत)

    हेल्लो  दोस्तों ! आज  हम आपको “दिखा है रुप त्योहारी” ! (गीत)  Share करने जा रहे हैं, जिसके  रचयिता “देवेश तनय” जी हैं। इस गीत में बहुत ही सुन्दर शब्दों का मेल है। इस गीत को पढ़ने के बाद मन में एक अलग ही लहर उत्पन्न हो उठेगी। तो आइए दोस्तों ! हम आपको यह गीत पेश करने जा रहे हैं और हम उम्मीद करते हैं कि यह गीत आपको जरूर पसंद आएगा।   दिया मंदिर बनाता है मिरे घर में उजालों के , दिवाली आ गई फिर से अमावस के ख्यालों में शगुन के रंग छलके हैं लिखा है गीत ऐपन से पढ़ी हैं राम की छवियां भरत के नैन दरपन से मिली है राम की चिट्ठी अयोध्या के शिवाली में शहर की तंग गलियों में नई खुशियां मचलती हैं चकरघिन्नी के चक्कर में कई नज़रें फिसलती हैं छुपाई रोशनी हमने अंधेरों के रूमालों में घरों में लौटती रौनक बहुत कुछ बोल जाती है

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    दीवाली की रात है ! (ग़ज़ल)

    आइए दोस्तों ! आज हम आपको “दीवाली की रात है” ग़ज़ल Share करने जा रहे हैं, जिनके रचयिता “लक्ष्मी शंकर वाजपेयी” जी हैं। इस ग़ज़ल में दिवाली से संबंधित ऐसे शब्दों का मेल हो रखा है। जिसे पढ़ने के बाद आप इस ग़ज़ल के जरिये कल्पना की दुनिया में चले जायँगे और इस ग़ज़ल को पढ़ने के बाद आपके विचार में बदलाव आने लगेंगे । तो आइए दोस्तों ! हम आपको यह ग़ज़ल पेश करने जा रहे हैं और हम उम्मीद करते हैं कि यह ग़ज़ल आपको जरूर पसंद आएगा।    रोशन हो हर मकाम दीवाली की रात है हो खूब धूमधाम दीवाली की रात है, लिख दो ज़रा सी रोशनी अपने मकान की उस झोपड़ी के नाम दीवाली की रात है, हर शख्स का हक़ है कि उजाले में जिए वो पहुंचाओ ये पैगाम दीवाली की रात है, बस्ती में मिले बराबर की रोशनी हो ऐसा इंतज़ाम दिवाली की

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    निशा बीती अब आ रे ! (नवगीत)

    हेल्लो  दोस्तों ! आज  हम आपको “निशा बीती अब आ रे !” नवगीत  Share करने जा रहे हैं,जिनकी रचयिता “डॉ. श्रुति मिश्रा” जी हैं। इस नवगीत में बहुत ही सुन्दर शब्दों का मेल है। इस नवगीत को पढ़ने के बाद मन में एक अलग ही लहर उत्पन्न हो उठेगी। तो आइए दोस्तों ! हम आपको यह नवगीत पेश करने जा रहे हैं और हम उम्मीद करते हैं कि यह नवगीत आपको जरूर पसंद आएगा।   रोपा है शब्द-शब्द बनने का एक चित्र, जिसमे हों रंग कई सारे। आशा की धड़कने , स्पंदित हों प्रतिक्षण ही , और स्वप्न उत्सुक से न्यारे !! महक उठे पवन-पवन ,सुरभित सा कोई इत्र, गीत मौन जाता अब आ ! रे…! कुछ तो हलचल सी मची , व्यग्र हुए प्राण-चित्त और भी व्याकुल हुए किनारे !! अनहद की ध्वनि-ध्वनि सी बिखरी है यत्र-तत्र, मृदु बने पयोदधि जल खारे ! रितु शरद की पूर्णिमा से निखरे मन-मुख-मयंक,

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    करवाचौथ का त्यौहार (कविता) !

    करवा चौथ न केवल एक पुरानी परंपरा है, बल्कि एक आत्मविश्वास है जो एक प्रेमपूर्ण और बहुरंगी पत्नी को उसके पति के अपने विश्वास, प्रेम और देखभाल पर है।यह एक ख़ुशी भरा संबंध है जिसमे आप जानते हैं कि यदि आप उनके साथ हर समय प्यार करना चाहते हैं तो वे सही हैं। आप अपनी तरफ से सही महिला रखने के लिए भाग्यशाली हैं! तो आइए दोस्तों ! करवाचौथ के इस शुभ अवसर पर हम आपके लिए एक कविता share करने जा रहे यहीं जो आपको काफी पसंद आएगी। करवा   चौथ   का   त्योहार लाए   ख़ुशियाँ   हजार हर   सुहागिं   के   दिल   का ये   अरमान   है  प्यारे   पिया   में   बसी उसकी   जान   है पिया   के   लिए   ही व्रत   करती   है   वह उसके   नाम   से   ही अपनी   माँग

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    प्रिय पतिदेव ! (कविता )

    कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। संसार में सबसे सुंदर रिश्ता प्यार का होता है। पति-पत्नी दोनों एकदूजे के पूरक हैं। लेकिन बदलते दौर में दो ‍विपरीत आदतों के लोगों का साथ में रहना सचमुच मुश्किल है लेकिन अगर आप सच्चा प्यार करते हैं और चाहते हैं कि आपका खूबसूरत रिश्ता सदा बना रहे। तो आइए दोस्तों ! आज हम आपको करवाचौथ के इस पवन अवसर पर आपको एक ऐसी कविता बताने जा रहे हैं। जिसे पढ़कर आपका अपने साथी के प्रति और भी स्नेह और प्यार बढ़ जायगा। मैं आपसे यह बिलकुल नहीं कहती कि मेरे लिए चाँद -तारे तोड़ लाओ, लेकिन जब शाम को तुम ऑफिस से आओ तो बस एक मुस्कान ले आओ !! मैं यह भी नहीं कहती कि दुनिया में

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    मीराबाई की भक्ति रस से भरी अनमोल कवितायेँ !

    मीराबाई की अधिकांश रचनाएँ उनके कृष्ण प्रेम से सम्बंधित हैं। यह बचपन से ही कृष्णभक्ति में रुचि लेने लगी थीं। इनकी भक्ति दिन-प्रतिदिन बढ़ती चली गई। ये मंदिरों में जाकर वहां मौजूद कृष्णभक्तों के सामने कृष्णजी की मूर्ति के आगे नाचती रहती थीं ! और आज इनका नाम भक्ति धारा के मुख्य संत भक्तों में आता है। उन की प्रमुख रचनायें हैं-बरसी का मायरा, गीत गोविन्द टीका, राग गोविन्द और राग सोरठ के पद आदि ।   तो आइए दोस्तों हम आपको संत मीरबाई की प्रसिद्ध कविता बताने जा रहे हैं, जो आपको काफी प्रेरणा देगी :- नहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो॥ थांरा देसा में राणा साध नहीं छै, लोग बसे सब कूड़ो। गहणा गांठी राणा हम सब त्यागा, त्याग्यो कररो चूड़ो॥ काजल टीकी हम सब त्याग्या, त्याग्यो है बांधन जूड़ो। मीरा के प्रभु गिरधर नागर बर पायो छै रूड़ो॥ हरि तुम हरो जन की भीर। द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढायो

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    “सिन्धु में ज्वार” Inspirational Poem by Atal Bihari Vajpayee.

    हेल्लो दोस्तों ! आज हम आपको “सिन्धु में ज्वार” नाम की Inpirational Poem Share करने जा रहे हैं ,जो भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री “अटल बिहारी वाजपेयी जी” द्वारा रचित है। सात भाई बहनों में सबसे छोटे अटल जी को बचपन से ही घर में रखी साहित्यक किताबों को पढ़ने का शौक था। उनका संपादक औऱ साहित्यकार बनने की तमन्ना थी | उन्होंने अपने कई interviews में  कहा है कि अगर मै नेता नही होता तो कवि जरूर होता | उनके राजनीति  में चले जाने से ज्यादातर समय तो उनका उसी कार्यो में बीता है | मगर जब भी उनको थोड़ा समय मिला तो उन्होंने अपने अन्दर कि कवि को कविता द्वारा सबके सामने रख दिया | तो आइए दोस्तों ! उन्ही की कविताओं में से एक कविता हम आपके साथ share करने जा रहे हैं, जो आपको Inspire जरूर करेगी।  आज सिन्धु में ज्वार उठा है , नगपति फिर

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    “पुष्प की अभिलाषा” Inspiring Poem by Makhanlal Chaturvedi.

    हेल्लो दोस्तों ! आज हम आपको आज़ादी के आंदोलन में तैयार  की गयी अनूठी कविता शेयर करने जा रहे हैं जिसका नाम है “पुष्प की अभिलाषा” जिसके रचयिता श्री “माखनलाल चतुर्वेदी जी” हैं। माखन लाल चतुर्वेदी अपने युग के हिन्दी साहित्य के बेहद लोकप्रिय कवियों में विशेष स्थान रखते हैं। द्विवेद्वी युग व छायावाद युग से साहित्य रचना का प्रारंभ कर देशभक्ति के रस-रंग में रचे-पगे कवि की रचनाओं में युग प्रवृत्तियों का अधिक प्रभाव न होकर अपनी मौलिक पहचान अधिक दिखाई दी। इनकी कविताओं ने आज़ादी के आन्दोलन के दौरान हज़ारों-लाखों युवाओं में देशप्रेम की भावना भर दी ।कहते हैं कोई देश जब अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा होता है तो उस समय वहां सबसे ज्यादा साहित्य रचा जा रहा होता है।  ऐसे ही मुश्किल समय में लिखने वाले माखनलाल चतुर्वेदी ,जिनकी कलम ही उनके लिए हथियार बन गयी थी। तो आइए दोस्तों हम आपको “पुष्प की

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    “नीर भरी दुख की बदली” Inspiring Poem by Mahadevi Verma.

    हेल्लो दोस्तों ! आज  हम आपको “नीर भरी दुख की बदली” कविता share करने जा रहे हैं,जिनकी रचयिता “महादेवी वर्मा” जी हैं। महादेवी वर्मा  रहस्यवाद और छायावाद की कवयित्री रही हैं। इनके काव्य में आत्मा-परमात्मा के मिलन विरह तथा प्रकृति के व्यापारों की छाया स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती है। वेदना और पीड़ा “महादेवी जी” की कविता के प्राण रहे हैं । उनका समस्त काव्य वेदनामय है। उन्हें निराशावाद अथवा पीड़ावाद की कवयित्री भी कहा गया है। तो आइए दोस्तों हम आपको “नीर भरी दुख की बदली” कविता बताने जा रहे हैं जो आपको काफी ज्यादा पसंद आएगी। मैं नीर भरी दु:ख की बदली! स्पंदन में चिर निस्पंद बसा, क्रन्दन में आहत विश्व हंसा, नयनों में दीपक से जलते, पलकों में निर्झरिणी मचली! मेरा पग-पग संगीत भरा, श्वासों में स्वप्न पराग झरा, नभ के नव रंग बुनते दुकूल, छाया में मलय बयार पली, मैं क्षितिज भॄकुटि पर घिर धूमिल, चिंता का

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    “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” :Inspirational Poem !

    हेल्लो दोस्तों ! आज मैं आपको एक ऐसी motivational poem बताने जा रहा हूँ, जिसको सुनकर आप काफी ज्यादा inspire होंगे और आपको कोई भी कार्य करने में अधिक से अधिक motivation मिलेगी | “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” बहुत सशक्त रचना है। इस रचना को हरिवंश राय बच्चन की रचना के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है। इस रचना के बारे में काफी समय से मतभेद है कि यह रचना “हरिवंश राय बच्चन” की है या निराला की! कुछ काव्य पर पकड़ रखने वाले लोग इसके शिल्प व शैली को देखते हुए इसे बच्चन या निराला की रचना न मानकर यह कहते रहे हैं कि यह रचना “सोहनलाल द्विवेदी” की रचना है। कोशिश करने वालों की लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है, चढ़ती दीवारों पर, बार बार फिसलती

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